देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में गुलदार और भालू के खौफ के बीच अब बंदरों, ततैयों और आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। राज्य के गरुड़, बागेश्वर, खटीमा और नारायणबगड़ क्षेत्रों में पिछले 24 घंटे के भीतर हुए अलग-अलग हमलों में सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों में स्कूल जा रहे मासूम बच्चे, ट्यूशन से लौट रहा छात्र और महिलाएं शामिल हैं। इस स्थिति से स्थानीय निवासियों में भारी दहशत व्याप्त है।
पहली घटना बागेश्वर जिले के कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत पगना-बिलीना मार्ग पर सामने आई, जहां गुरुवार सुबह करीब पौने सात बजे स्कूल जा रहे छह मासूम बच्चों पर अचानक ततैयों के विशाल झुंड ने हमला बोल दिया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर दौड़े स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाया और जिला अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक इलाज के बाद पांच बच्चों को छुट्टी दे दी गई, जबकि गंभीर रूप से डंक के शिकार हुए लक्की टाकुली को जिला अस्पताल में भर्ती रखा गया है।
दूसरी ओर, गरुड़ के ग्वाड़-पजेणा गांव निवासी 14 वर्षीय छात्र प्रियांशु जोशी बुधवार सुबह घांगली बाजार से ट्यूशन पढ़कर घर लौट रहा था। रास्ते में सात से आठ आक्रामक बंदरों के झुंड ने उसे घेर लिया। छात्र ने जब उन्हें भगाने की कोशिश की तो बंदरों ने हमला कर उसके दाएं पैर के पिछले हिस्से में चार जगह दांत गड़ा दिए। वहीं, खटीमा के पचौरिया नई बस्ती में दुकान से लौट रही सुमन नामक महिला पर भी बंदरों के झुंड ने हमला कर उन्हें लहूलुहान कर दिया।
इधर, चमोली जिले के नारायणबगड़ बाजार में पिछले तीन दिनों से आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले स्थानीय निवासी नीरज पुरोहित और पुष्कर रावत को आवारा कुत्तों ने बुरी तरह काटकर घायल कर दिया। लगातार हो रहे इन हमलों के कारण स्थानीय व्यापारियों और बाजार आने वाले लोगों में भारी खौफ का माहौल बना हुआ है।
पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे इस मानव-वन्यजीव और आवारा पशु संघर्ष पर वन विभाग ने संज्ञान लिया है। गरुड़ के वन क्षेत्राधिकारी एमएस गुसाईं ने बताया कि घायल छात्र को नियमानुसार जल्द मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, नारायणबगड़ में खूंखार आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए वन विभाग और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीमों को तुरंत प्रभाव से क्षेत्र में तैनात कर दिया गया है।

