उत्तराखंड के ‘तिमूर’ और ‘कुंजा’ उत्पादों को मिलेगा पेटेंट का सुरक्षा कवच, बाजार में मचेगी धूम

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उत्तराखंड के पारंपरिक और प्राकृतिक संसाधनों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देने के लिए सगंध पौधा केंद्र सेलाकूई ने एक बड़ी पहल शुरू की है। इसके तहत राज्य में प्राकृतिक रूप से उगने वाले तिमूर के बीजों से तैयार होने वाले अनूठे इत्र और कुंजा घास की पत्तियों से बनने वाले एंटी-डैंड्रफ शैंपू के प्रसंस्करण को पेटेंट दिलाने की तैयारी की जा रही है।

इस पेटेंट सुरक्षा कवच के मिलने के बाद कोई भी अन्य बाहरी कंपनी इन उत्पादों के नाम, फॉर्मूले या इन्हें बनाने की गुप्त प्रक्रिया की नकल नहीं कर पाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर इन जैविक उत्पादों के उत्पादन और व्यापार को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

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आपको बता दें कि साल 2023 में वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तिमूर से बने इस विशेष इत्र की ब्रांडिंग की थी, जिसके बाद अब ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से बाजार में इसकी मार्केटिंग के लिए तीन साल का एक विशेष अनुबंध भी किया गया है।

पिथौरागढ़ में होगी तिमूर की व्यावसायिक खेती

उत्तराखंड में अब तक तिमूर का पौधा केवल जंगलों में प्राकृतिक और सीमित रूप से ही उगता आया है, जिसके औषधीय गुणों से भरपूर बीजों का उपयोग स्थानीय ग्रामीण मुख्य रूप से मसाले के रूप में करते हैं। पड़ोसी देश नेपाल में इसकी बड़े पैमाने पर हो रही व्यावसायिक खेती को देखते हुए अब उत्तराखंड सरकार ने भी प्रदेश के भीतर इसे स्वरोजगार का जरिया बनाने के लिए कदम बढ़ाए हैं, जिसके तहत सीमांत जिले पिथौरागढ़ में एक विशेष ‘तिमूर घाटी’ विकसित की जा रही है।

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सगंध पौधा केंद्र सेलाकूई के निदेशक नृपेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, इस मुहिम को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए केंद्र द्वारा करीब 1.50 लाख तिमूर के पौधों की एक विशाल नर्सरी तैयार की जा रही है ताकि किसानों को इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इसके साथ ही, संस्थान द्वारा तिमूर से टूथपेस्ट, सॉस और कई अन्य उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ तैयार करने पर भी तेजी से शोध कार्य किया जा रहा है।