आबकारी विभाग में गलत नियुक्ति की जांच से बचने के लिए राजनीतिक आकाओं के संरक्षण में पहुंचे विभाग के ये सुरमा

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देहरादून, उत्तराखंड आबकारी विभाग के अधिकारी कब क्या गुल खिला दें, कुछ कहा नहीं जा सकता.. ताजा मामला पीआरडी के जवानों को विभाग में एडजेस्ट करने से जुड़ा हुआ है.. जहां कर्मचारी तनख्वाह तो विभाग की ले रहे हैं और सेवाएं विभाग के किसी अधिकारी को दे रहे है… जी हां सूत्रों के अनुसार आबकारी मुख्यालय के दो अधिकारियों ने पीआरडी के 2 कर्मचारियों को विभाग से वेतन दिलाते हुए अपने निजी कामों के लिए एडजेस्ट करवा दिया।। जिससे साफ पता चलता है कि चर्चाओं में रहने वाले आबकारी विभाग पर यह अधिकारी किस कदर पलीता लगा रहे हैं।। दरअसल विभाग के अधिकारियों के निजी कार्यों के लिए तैनात कर्मचारियों को वेतन तो आबकारी मुख्यालय के द्वारा दिया जा रहा है लेकिन यह सेवाएं उन अधिकारियों को दे रहे हैं जिन्होंने इन्हे अपने निजी कामों के लिए एडजेस्ट कराया है। 13फरवरी 2020 में पीआरडी से रखे गए भारत भूषण पुत्र जीवन सिंह, पता केयर ऑफ उदय सिंह राणा, राम हिल व्यू कुल्हान सहस्त्रधारा रोड देहरादून और दूसरा कर्मचारी कृष्णा पुत्र धर्मानंद 131 ब्लू वाली पोस्ट ऑफिस कंडोली देहरादून 1जनवरी 2019 से आबकारी विभाग के ना जाने किस अनुभाग में अपनी सेवा दे रहे है।। सूत्र बताते है कि जिनके द्वारा इन्हे एडजेस्टमेंट किया गया है यह उन्ही के घरों में सेवा दे रहे है जबकि इनका वेतन लगातार आबकारी मुख्यालय की ओर से जारी किया जा रहा है।। आपको बता दें कि दोनों ही कर्मचारी पीआरडी के हैं।।हालाकि मामला आयुक्त / सचिव आबकारी के संज्ञान में आते ही जांच के लिखित आदेश भी दे दिए गए है।। आयुक्त आबकारी ने विभागीय जांच के निर्देश देते हुए कहा है कि कृष्णानंद व भारत भूषण पीआरडी जवान की तैनाती कहां है व किस प्रकार उनका वेतन आहरण किया जा रहा है।। इसके साथ ही आहरण वितरण अधिकारी को भी दोनो कर्मचारियों का वेतन आहरण न करने के निर्देश दिए गए है।। खास बात यह है कि इन कर्मचारियों को विभाग से हटाने के लिए भी कह दिया गया है। साथ ही आबकारी विभाग के सीनियर अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी देते हुए इन कर्मचारियों के द्वारा अब तक सेवाएं कहां दी गई है का उल्लेख जांच रिपोर्ट में करने के लिए भी कहा गया है। सूत्र बताते हैं कि जांच का आदेश होते ही उन अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया जो इस पूरे कुचक्र के पीछे शामिल थे लिहाजा अब ऐसे अधिकारियों की तरफ से राजनीतिक संरक्षण लेने के लिए अपने राजनीतिक आकाओं के चक्कर काटने का सिलसिला भी तेज कर दिया गया है।

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