देहरादून। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बकाया ट्रैफिक जुर्माना वसूलने के लिए बेहद कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सड़क सुरक्षा से जुड़ी एक लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा आदेश जारी किया है, जिसका सीधा असर लापरवाह वाहन चालकों पर पड़ेगा।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यातायात नियमों के उल्लंघन पर केवल ई-चालान जारी करते रहना ही पर्याप्त नहीं है। अदालत ने सवाल उठाया है कि आखिर ई-चालान के जरिए लगाए गए जुर्मानों की वसूली कैसे की जाए, क्योंकि बहुत से लोग समय पर जुर्माने का भुगतान नहीं करते हैं।
इस मामले में कड़ाई दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को वाहनों की औचक जांच करने का हुक्म दिया है। आदेश में कहा गया है कि यदि औचक जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी वाहन मालिक ने बकाया ई-चालान का भुगतान नहीं किया है, तो उनकी गाड़ी तुरंत जब्त कर ली जाए।
अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि ये निर्देश केवल कागजों पर ही रहे और अधिकारियों द्वारा जमीन पर सख्ती से लागू नहीं किए गए, तो अदालत को एक दिन बहुत कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एआई (AI) आधारित इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट सिस्टम बनाने का भी आदेश दिया है।
यह आधुनिक सिस्टम 12 प्रकार के यातायात उल्लंघनों की सटीक पहचान करेगा, जिससे पूरे देश में नियमों के मुताबिक ई-चालान जारी करने की सुविधा मिलेगी। परिवहन मंत्रालय को एक ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाने को कहा गया है, जिस पर राज्यवार और नेशनल हाईवे का ई-चालान डेटा हर महीने अपडेट किया जाएगा।
डेटा के रियल-टाइम एक्सचेंज के लिए वाहन-4, सारथी, ई-चालान, आईआरएडी और राज्य तथा केंद्र के ट्रैफिक कंट्रोल रूम को आपस में जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, बार-बार नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा कसने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने और लाइसेंस निलंबित करने जैसे सख्त उपाय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

