उत्तराखंड में करोड़ो रुपये के अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति फर्जीवाड़े को लेकर राज्य सरकार ने संदिग्ध शिक्षण संस्थानों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। देहरादून स्थित अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने प्रदेश के 5 जिलों में सक्रिय कुल 30 कॉलेजों को ब्लैकलिस्ट/चिह्नित करते हुए उनसे 1.35 करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत रिकवरी करने का सख्त आदेश जारी किया है।
इस बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक दीप्ति सिंह ने देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और पौड़ी के जिला अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से वसूली सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग की इस सख्त कार्रवाई से फर्जीवाड़ा करने वाले संदिग्ध शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों में हड़कंप मच गया है।
के तहत यह पूरी दंडात्मक कार्रवाई भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की वर्ष 2021-22 और 2022-23 की छात्रवृत्ति योजनाओं में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के आधार पर हो रही है। विशेष जांच दल की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा होने के बाद विभाग ने वसूली और कानूनी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पांच जिलों के इन 30 संदिग्ध संस्थानों से कुल 1,35,53,300 रुपये की वसूली की जाएगी। इस क्रम में हरिद्वार जिले के 19 शिक्षण संस्थानों से ₹68.80 लाख, ऊधमसिंह नगर जिले के 7 शिक्षण संस्थानों से ₹27.68 लाख, नैनीताल जिले के 2 शिक्षण संस्थानों से ₹21.65 लाख, देहरादून जिले के 1 शिक्षण संस्थान से ₹16.74 लाख और पौड़ी जिले के भी 1 शिक्षण संस्थान से कुल ₹18,300 की रिकवरी की जाएगी।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि एसआईटी जांच के दायरे में आए इन सभी संस्थानों को जल्द से जल्द यह राशि सरकारी खजाने में लौटानी होगी। निर्धारित समय में शत-प्रतिशत रिकवरी न होने की स्थिति में इन संदिग्ध कॉलेजों के खिलाफ वित्तीय कुर्की के साथ-साथ मुकदमों की कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।

