भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में कर्ज वसूली (लोन रिकवरी) के दौरान बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा अपनाए जाने वाले सख्त और अनुचित तौर-तरीकों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने नए नियमों का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत अब कोई भी बैंक या लोन कंपनी ईएमआई या बैंक किस्त चूकने वाले ग्राहकों के मोबाइल फोन की सेवाओं को पूरी तरह बंद या सीमित नहीं कर सकेगी।
आरबीआई ने साफ किया है कि कर्ज की वसूली के लिए ऐसी किसी भी तकनीकी व्यवस्था या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने पर सख्त पाबंदी होगी जो उधारकर्ता के मोबाइल फोन या टैबलेट की कार्यक्षमता को बाधित करती हो। इन नए नियमों को आगामी 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू करने की योजना है, जिस पर सभी हितधारक आगामी 31 मई तक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
कर्ज पर फोन लिया हो तो कुछ सेवाएं रोकने का प्रावधान
आरबीआई ने नए नियमों में एक विशेष स्थिति को लेकर कुछ शर्तें भी तय की हैं। यदि किसी ग्राहक ने मोबाइल फोन को खुद उसी बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा दिए गए विशेष लोन से खरीदा है और वह उसकी किस्तें नहीं चुका रहा है, तो बैंक को उस फोन की कुछ चुनिंदा सुविधाओं को सीमित करने का अधिकार होगा।
हालांकि, बैंक ऐसा कदम केवल तभी उठा सकेगा जब मोबाइल फोन का वह ऋण 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया श्रेणी में बना रहा हो और बैंक द्वारा बकायदा औपचारिक नोटिस दिए जाने के बावजूद ग्राहक ने भुगतान न किया हो।
नियम तोड़ने पर बैंकों को देना होगा भारी जुर्माना
केंद्रीय बैंक ने नए नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए बैंकों पर कड़े जुर्माने की व्यवस्था भी की है। यदि कोई उधारकर्ता अपना बकाया लोन चुका देता है, तो बैंकों को महज एक घंटे के भीतर उसके मोबाइल की सभी बाधित सेवाओं को अनिवार्य रूप से बहाल करना होगा।
यदि बैंक तय समय सीमा के भीतर सेवाएं चालू करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें ग्राहक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से हर्जाना देना होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बैंकों की मनमानी को रोका जा सके और ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

