उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में खनन रॉयल्टी की संशोधित दरों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। पिछली कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय पर राज्यपाल की मुहर लगने के बाद अब संशोधित उपखनिज नियमावली को राज्य में प्रभावी बना दिया गया है। इस नए बदलाव के तहत नदी तल से निकलने वाले बोल्डर, बजरी, मिट्टी और बालू जैसे उपखनिजों पर रॉयल्टी बढ़ा दी गई है, जिससे राज्य सरकार को सालाना करीब 50 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होने की उम्मीद है। हालांकि, रॉयल्टी में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर निर्माण सामग्री की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे आम जनता के लिए घर बनाना पहले की तुलना में अधिक खर्चीला होने के आसार हैं।
निजी भूमि पर खनन और नई दर प्रणाली
सरकार ने निजी भूमि पर आवंटित खनन पट्टों के लिए भी रॉयल्टी दरों में बड़ा संशोधन किया है। अब मैदानी और पर्वतीय दोनों ही क्षेत्रों के लिए समान रॉयल्टी दर 8 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित की गई है। इसके साथ ही कार्यदायी संस्थाओं के लिए रॉयल्टी में एक रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की गई है। उल्लेखनीय है कि गौला, कोसी और दाबका जैसी विशिष्ट नदी क्षेत्रों की रॉयल्टी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन हरिद्वार सहित अन्य क्षेत्रों में राजस्व और वन भूमि के पट्टों पर बालू और बोल्डर की रॉयल्टी बढ़ाकर 8 रुपये प्रति कुंतल कर दी गई है।
भारी मशीनों पर प्रतिबंध और परिवहन के नए नियम
नई नियमावली के तहत पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए खनन कार्यों में पोकलैंड, जेसीबी और लिफ्टर जैसी भारी मशीनों के उपयोग पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इन मशीनों का उपयोग केवल खनन क्षेत्र तक रास्ता बनाने या फंसे हुए वाहनों को निकालने जैसे सीमित कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा, जिसके लिए एसडीएम की अनुमति अनिवार्य होगी। परिवहन के क्षेत्र में भी राहत देते हुए व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत 80 हॉर्स पावर तक के ट्रैक्टर-लोडर को खनन कार्य की अनुमति दी गई है, लेकिन वे जल प्रवाह क्षेत्र से बाहर रहकर ही अपना कार्य कर सकेंगे।
निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव
नियमों के अनुसार, 125 सेंटीमीटर से कम आकार वाली खनन सामग्री पर रॉयल्टी को 88.50 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर सीधे 100 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। इसके अलावा 50 रुपये प्रति टन की अतिरिक्त रॉयल्टी का भी प्रावधान किया गया है। रॉयल्टी दरों में इस व्यापक संशोधन का मुख्य उद्देश्य अवैध खनन पर अंकुश लगाना और सरकारी खजाने को मजबूत करना है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईंट, बालू और कंक्रीट जैसी बुनियादी निर्माण सामग्रियों के दाम बढ़ जाएंगे जिसका बोझ अंततः आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

