देहरादून। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की देहरादून शाखा ने फर्जी अधिकारी बनकर लोन पास कराने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले मुख्य आरोपी प्रभु दयाल उर्फ ऋषि गुप्ता को आगरा से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी खुद को कृषि भवन, नई दिल्ली के पशुपालन एवं डेयरी विभाग का अफसर बताता था। उसने उधमसिंह नगर के एक पॉल्ट्री फार्म संचालक से लोन स्वीकृत कराने के एवज में रिश्वत मांगी थी। रविवार को कोर्ट में पेशी के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
मामले में सीबीआई ने 29 जून को प्राथमिकी दर्ज की थी। उधमसिंह नगर के पीड़ित पॉल्ट्री फार्म संचालक का आरोप था कि आरोपी ने 22.50 लाख रुपये का लोन मंजूर कराने के लिए 45 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। सीबीआई ने जाल बिछाकर जांच शुरू की, जिसमें आरोपी ने क्यूआर कोड के जरिए 5 हजार रुपये की पहली किश्त अपने साथी विकास त्रिपाठी के खाते में ट्रांसफर करवाई। विकास त्रिपाठी को सीबीआई 30 जून को पहले ही जेल भेज चुकी है।
सीबीआई की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि आरोपी ऋषि गुप्ता किसी भी सरकारी विभाग में तैनात नहीं है। वह पशुपालन अवसंरचना विकास निधि में लोन आवेदन करने वालों का डेटा चुराता था। इसके बाद खुद को विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर आवेदकों को लोन रद्द होने का डर दिखाता था और मोटी रकम ऐंठता था।
अपनी पहचान छिपाने के लिए आरोपी दूसरों के सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल करता था और बार-बार अपने ठिकाने बदलता था। सीबीआई ने डिजिटल सर्विलांस, कॉल डिटेल और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़कर आरोपी का सुराग लगाया। इसके बाद आगरा के गांव छोटा पूथा बिसराना स्थित उसके घर पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जहां से कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
दूसरी तरफ, सीबीआई की टीम ने एक अन्य बड़ी कार्रवाई करते हुए 1109 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में शनिवार को उत्तराखंड के काशीपुर स्थित एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर छापेमारी की। यह कार्रवाई ओडिशा की कंपनी ‘गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज केस के सिलसिले में की गई है। काशीपुर स्थित यह फैक्टरी कंपनी के लिए बिजली उपकरण तैयार करती है।
भुवनेश्वर की विशेष सीबीआई अदालत से जारी वारंट के आधार पर काशीपुर के अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और ओडिशा में कुल 6 ठिकानों पर रेड मारी गई है। सीबीआई जांच के मुताबिक, कंपनी ने केनरा बैंक से 1109 करोड़ रुपये का लोन लिया था। फर्जी दस्तावेज तैयार कर, स्टॉक का फर्जी मूल्य दिखाकर और बही-खातों में हेराफेरी करके बैंक के साथ इतनी बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया था।

