मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों के भीतर केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आमतौर पर केरल में मानसून के पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून होती है, लेकिन इस बार अल नीनो के प्रभाव के कारण इसमें थोड़ी देरी दर्ज की गई है। अच्छी बात यह है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं के लिए परिस्थितियां अब पूरी तरह से अनुकूल बन चुकी हैं और ये हवाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
इसके प्रभाव से जल्द ही केरल, तमिलनाडु और तटीय आंध्र प्रदेश में भारी बारिश और गरज के साथ बौछारें शुरू होने की उम्मीद है। आम दिनों में मानसून सबसे पहले केरल में प्रवेश करता है और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए आमतौर पर 15 जुलाई तक पूरे भारत को कवर कर लेता है, हालांकि इस बार मौसम विभाग ने देश भर में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका भी जताई है।
इस साल उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते नौतपा पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ है। इस मौसमी बदलाव के कारण फिलहाल उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भीषण लू चलने की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है, जिससे स्थानीय लोगों को चिलचिलाती गर्मी से बड़ी राहत मिली है।
पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी का येलो अलर्ट
उत्तराखंड राज्य में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने वाला है, जिसके तहत पर्वतीय इलाकों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में भी मौसम में तब्दीली देखी जाएगी। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, राज्य के पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना है, जबकि 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ऊंचे इलाकों में बर्फबारी के आसार बने हुए हैं। इसके साथ ही, मैदानी और संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली चमकने, तेज आंधी और तूफान चलने की आशंका को देखते हुए विभाग की ओर से बकायदा एक येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।

