ईरान-अमेरिका बातचीत ठप, पुतिन ने अराघची को दिया खुला समर्थन

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मिडिल ईस्ट में दो महीने की खूनी जंग के बाद हालात नौ दिन चले अढाई कोस वाले ही हैं। देखा जाए तो ईरान,अमेरिका और इजराइल जहां से चले थे दो महीने बाद भी वहीं के वहीं हैं, हां इतना जरूर है कि तीनो मुल्कों ने खोया बहुत कुछ है। किसी को ज्यादा नुकसान हुआ तो किसी को कम लेकिन नुकसान सबको हुआ है यहां तक कि दुनिया के अधिकांश मुल्क मिडिल ईस्ट की अशांति का दंश झेलने को मजबूर हैं।

ताजा हालात ये है कि फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता रुकी हुई है। इस बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची सोमवार को रूस पहुंचे और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। पुतिन ने दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए साफ कहा कि रूस मिडिल ईस्ट में शांति के लिए “हरसंभव मदद करेगा ।

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वहीं अराघची ने अब तक की शांति वार्ता के बेनतीजा रहने का ठीकरा अमेरिका के सिर पर फोड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंट पीटर्सबर्ग में अराघची ने कहा कि “अमेरिका की ज्यादा मांगों” की वजह से शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही है। वहीं अराघची ने रूसी मीडिया से कहा – “ईरान दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर से लड़ा और ईरान के स्वाभिमान भरे बुलंद हौसलों के चलते अमेरिका अपना जंग का मकसद पूरा नहीं कर पाया। आज अमेरिका घुटने के बल बैठने को मजबूर है लिहाजा वो बातचीत मांग रहा है। जिस पर हम विचार कर रहे हैं”।

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ईरान ने दो टूक कहा है कि अमन कायम हो सकता है जंग बंद हो सकती है अगर अमेरिका न्यूक्लियर मुद्दे और होर्मुज स्ट्रेट पर अड़ियल रुख न अपनाए। ईरान का प्रस्ताव है कि अमेरिका पहले होर्मुज स्ट्रेट से अपनी नौसेना को हटाए ।

वहीं पुतिन ने कहा कि, रूस “गारंटीड पीस” के लिए सब कुछ करेगा ताकि जंग दोबारा न हो। रूस ने “गुडविल या मीडिएशन सर्विस” ऑफर की है जो दोनों पक्षों को मंजूर हो। रूसी सांसद एलेक्सी पुश्कोव बोले कि अमेरिका ईरान से सैन्य टकराव के लिए तैयार नहीं था और उसने तेहरान की तैयारी को कम आंका।

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बहरहाल ईरानी विदेश मंत्री अराघची ओमान और पाकिस्तान के दौरे के बाद रूस पहुंचे हैं। बैकचैनल कोशिशें जारी हैं, पर फिलहाल सीधी बातचीत ठप है। बावजूद इसके दुनिया की नजर अब होर्मुज स्ट्रेट और पुतिन की मध्यस्थता पर टिकी है।

क्योंकि बेशक मौजूदा वक्त में मिडिल ईस्ट में सीजफायर का माहौल है लेकिन ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक कर रखा है। इससे तेल, गैस और फर्टिलाइजर की सप्लाई रुकी है। तेल के दाम बढ़ गए हैं और विकासशील देशों में खाद्य संकट का खतरा मंडरा रहा है।

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