पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में भारी उछाल, घरेलू तेल कंपनियों को बड़ा नुकसान

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वैश्विक स्तर पर ईरान संकट और बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उबाल ने अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। सरकार ने देश में खुदरा और थोक महंगाई के बीच पेट्रोल तथा डीजल के दामों में तीन रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर आम जनता को बड़ा झटका दिया है। इसके साथ ही वाहनों और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी (CNG) की कीमतों में भी दो रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है।

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नई दरें शुक्रवार सुबह से लागू हो चुकी हैं, जिसके बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90.67 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरों में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी और एलपीजी सिलेंडरों के दामों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ईरान संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव

ईंधन की कीमतों में आई यह तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दामों का परिणाम है। दरअसल, 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति शुरू होने से पहले जो क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल बिक रहा था, वह अब उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।

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इसके चलते घरेलू तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन करीब 1,200 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसकी भरपाई और अंडर रिकवरी को कवर करने के लिए सरकार को यह सख्त कदम उठाना पड़ा है। जानकारों का मानना है कि कंपनियों को युद्ध-पूर्व के लाभ स्तर पर लौटने के लिए आने वाले समय में 10 रुपये प्रति लीटर तक की और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।