देहरादून। हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद शुरू हुआ शुद्धिकरण विवाद अब देशव्यापी राजनीतिक तूफान बन चुका है। इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्थान को धोने के बजाय भाजपा को अपनी अशुद्ध मानसिकता का शुद्धिकरण करने की जरूरत है।
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि रैली स्थल पर कथित पूजा-पाठ और शुद्धिकरण करने वाले लोगों का सीधा संबंध भाजपा और आरएसएस से है। उन्होंने कहा कि यह घटना संविधान के मूल्यों का खुला उल्लंघन और देश के कानून का अपमान है। इसके बावजूद राज्य और केंद्र सरकार की इस विषय पर चुप्पी बेहद हैरान करने वाली है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सामाजिक दृष्टिकोण से सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ ऐसा बर्ताव हो सकता है, तो गांवों में रहने वाले आम दलित नागरिकों को रोजाना किस अपमान से गुजरना पड़ता होगा। उन्होंने मांग की कि इस कृत्य को अंजाम देने वाले असामाजिक तत्वों पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
हरीश रावत ने प्रशासन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस सामाजिक भेदभाव और संवैधानिक अपमान के खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई जारी रखेगी।
उल्लेखनीय है कि हल्द्वानी के इस शुद्धिकरण विवाद ने अब उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज कर दी है। जहां कांग्रेस इसे छुआछूत और दलित अस्मिता से जोड़कर बीजेपी को घेर रही है, वहीं बीजेपी इसे केवल धार्मिक स्थल का स्वच्छता अभियान बताकर कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है।

