उत्तराखंड में बिजली की मांग का भारी दबाव बढ़ने पर भी अब अचानक ग्रिड फेल होने की समस्या नहीं होगी। अमर उजाला ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने राज्य में बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सुचारू बनाने के लिए ‘उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग विनियम 2026’ का एक महत्वपूर्ण ड्राफ्ट जारी किया है।
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य राज्य स्तर पर ग्रिड की फ्रीक्वेंसी को 50 हर्ट्ज के करीब बनाए रखना और नेटवर्क में आने वाली किसी भी बाधा को तुरंत दूर करना है, जिससे पूरी बिजली व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित रहे। वहीं ग्रिड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दो स्तर की सहायक सेवाएं लागू की जाएंगी, जो ऑटोमैटिक सिग्नल मिलते ही क्रमशः 30 सेकंड और 15 मिनट के भीतर सक्रिय होकर ग्रिड को घंटों तक मजबूत बैकअप प्रदान करेंगी। फिलहाल इस ड्राफ्ट पर आम जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं, जिसके बाद इसे अंतिम रूप देकर पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले बिजली घरों को मिलेगा विशेष इनाम
स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के माध्यम से ग्रिड को संतुलित करने के लिए बिजली कंपनियों को ऑटोमैटिक सिग्नल भेजे जाएंगे, जिसके तहत त्वरित और सटीक रिस्पॉन्स देने वाले बिजली घरों को पुरस्कृत करने का प्रावधान किया गया है। जो कंपनियां सिग्नल मिलने पर 95 प्रतिशत या उससे अधिक का सटीक प्रदर्शन करेंगी, उन्हें 50 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा, जबकि 75 से 95 प्रतिशत तक के प्रदर्शन पर 40 पैसे और 60 से 75 प्रतिशत तक के प्रदर्शन पर 30 पैसे प्रति यूनिट का इनाम मिलेगा।
इसके विपरीत, यदि कोई बिजली प्रदाता लगातार दो दिनों तक 20 प्रतिशत से कम का निराशाजनक प्रदर्शन करता है, तो उसे एक सप्ताह के लिए इस सेवा से निलंबित कर दिया जाएगा, और निर्देशों का उल्लंघन करने पर बिजली अधिनियम के तहत जुर्माना भी वसूला जाएगा।
ग्रिड को संकट से बचाने और उसकी सुरक्षा के लिए बिजली की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को भी नया रूप दिया गया है। टर्शियरी रिजर्व के लिए बिजली की खरीद एक दिन पहले और रियल-टाइम के सहायक सेवा बाजारों के माध्यम से पावर एक्सचेंज के जरिए बोली प्रक्रिया अपनाकर की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, जिन निजी या बाहरी बिजली घरों का उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ कोई सीधा करार नहीं है, लेकिन उनके पास अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है, ग्रिड में किल्लत या इमरजेंसी होने पर एसएलडीसी ग्रिड की सुरक्षा के लिए उनकी बिजली का इस्तेमाल कर सकेगा। इसके बदले में उन बिजली घरों को तय नियमों के अनुसार उचित भुगतान किया जाएगा, जिससे संकट के समय भी राज्य में निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।
किशऊ बांध परियोजना से मिलेगी भरपूर बिजली और पानी
यमुना नदी की सहायक टोंस नदी पर प्रस्तावित किशऊ बांध परियोजना को लेकर सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। हिमाचल प्रदेश के लोक भवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात के दौरान उन्होंने बताया कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना है, जिससे उत्तराखंड को बड़े पैमाने पर बिजली और सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति होगी।
इस परियोजना से 1,324 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की उपलब्धता होगी, जिससे 97,076 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी और साथ ही 617 मिलियन क्यूबिक मीटर स्वच्छ पेयजल भी उपलब्ध होगा। हालांकि, बांध के निर्माण के कारण उत्तराखंड की लगभग 1,452 हेक्टेयर भूमि और हिमाचल प्रदेश की लगभग 1,498 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होगी, लेकिन इस बांध से मिलने वाले 660 मेगावाट जलविद्युत के उत्पादन से उत्तराखंड को बिजली का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होगा।

