उत्तराखंड सरकार ने राज्य की महत्वपूर्ण योजनाओं की कार्यक्षमता और प्रभाव को परखने के लिए एक नई पहल शुरू की है। सचिवालय में आयोजित स्टेट प्रगति बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रमुख सरकारी योजनाओं का अब हर पांच साल में अनिवार्य रूप से मूल्यांकन कराया जाना चाहिए। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ जनता तक सही तरीके से पहुँच रहा है या नहीं और यदि कहीं कोई कमी है तो उसमें समय रहते सुधार किया जा सके।
स्वरोजगार योजनाओं में तेजी और बैंकों के साथ समन्वय
मुख्य सचिव ने राज्य में स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली प्रमुख योजनाओं, जैसे ‘सीएम स्वरोजगार योजना’ और ‘वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना’ पर विशेष ध्यान देने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि लाभार्थियों को ऋण और अन्य सुविधाएं मिलने में देरी न हो। इसके साथ ही नरेंद्रनगर एसटीपी निर्माण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए आपसी संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
मिशन एप्पल की सफलता और क्लस्टर आधारित कार्यप्रणाली
कृषि और बागवानी के क्षेत्र में ‘मिशन एप्पल’ योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई रणनीति अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि इस योजना की सफलता के लिए क्लस्टर आधारित कार्यप्रणाली का उपयोग किया जाना चाहिए और राज्य के प्रगतिशील किसानों को सीधे इस मिशन से जोड़ा जाना चाहिए। इसके अलावा, उत्पादों के संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की बात भी बैठक में प्रमुखता से कही गई है।

