उत्तराखंड में गर्मी की शुरुआत होते ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। ताज़ा मामला मसूरी और चकराता क्षेत्र का है, जहाँ भीषण आग लगने से कई हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो गया है। मसूरी वन प्रभाग की रखोली और मोतीधार बीट में रविवार और सोमवार को आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद इस पर काबू पाया। वहीं चकराता के जंगलों में लगी आग इतनी विकराल थी कि उसे बुझाने में करीब 48 घंटे का समय लगा। इस वनाग्नि से बहुमूल्य पेड़ों और पर्यावरण को भारी क्षति पहुँची है।
मसूरी रेंज में समय रहते कार्रवाई
मसूरी वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाली रखोली बीट में 26 अप्रैल की रात को आग धधक उठी थी। वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में विभागीय टीम ने तुरंत मौके पर पहुँचकर आग पर नियंत्रण पाया। इसके अगले ही दिन मोतीधार बीट के टिपरी धार क्षेत्र में भी आग लग गई, जिसे वन दरोगा अभिषेक और उनकी टीम ने समय रहते बुझा लिया, जिससे बड़ी मात्रा में वन संपदा को नष्ट होने से बचा लिया गया।
चकराता में 48 घंटे तक चला अभियान
चकराता के चिलमिरी बीट में शनिवार रात को लगी आग ने कुछ ही घंटों में भयानक रूप ले लिया था। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि जंगल का एक बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। सूचना मिलते ही छावनी परिषद के कर्मचारियों और सेना के जवानों ने मोर्चा संभाला। लगातार 48 घंटों तक चले संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सोमवार तड़के करीब 3 से 4 बजे के बीच आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
पर्यावरण और वन संपदा को क्षति
इन घटनाओं ने एक बार फिर जंगलों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है। चकराता में बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ जल गए हैं, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को भारी नुकसान हुआ है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगलों में सावधानी बरतें ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

