बोर्डर पर आबकारी चौकी बेअसर, पुलिस ने किया बड़ा प्रहार, 120 पेटी शराब के साथ 3 तस्कर गिरफ्तार….

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार अवैध शराब की तस्करी पर रोक लगाने के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर आबकारी विभाग को संसाधन, चेकपोस्ट और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष रूप से आबकारी चौकियां स्थापित की गई हैं ताकि पड़ोसी राज्यों से आने वाली अवैध शराब की खेप को राज्य की सीमा पर ही रोका जा सके। अधिकारियों द्वारा समय-समय पर सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश भी दिए जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है।

ऐसा ही एक मामला विकासनगर क्षेत्र में सामने आया है, जहां आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पांवटा साहिब की ओर से उत्तराखंड में प्रवेश कर रहे एक छोटे हाथी वाहन से 120 पेटी अवैध शराब बरामद कर विकासनगर पुलिस ने तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल शराब तस्करी के एक बड़े नेटवर्क पर चोट की है, बल्कि आबकारी विभाग की सीमा चौकी की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मार्ग पर आबकारी विभाग की चौकी मौजूद है और जहां नियमित जांच की जिम्मेदारी विभाग की है, वहां से इतनी बड़ी खेप आखिर बिना किसी रोक-टोक के कैसे निकल गई? यदि पुलिस सक्रियता नहीं दिखाती तो संभव है कि यह पूरी खेप अपने गंतव्य तक पहुंच जाती और अवैध शराब का कारोबार फलता-फूलता रहता।

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में आबकारी चौकियां इसी उद्देश्य से स्थापित की हैं कि राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच हो सके और अवैध शराब की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। इन चौकियों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन और अन्य व्यवस्थाओं पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद यदि 120 पेटी जैसी बड़ी खेप बिना पकड़े आगे बढ़ जाती है तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।

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दूसरी ओर, विकासनगर पुलिस की मुस्तैदी काबिले-तारीफ रही। पुलिस ने सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की और वाहन को रोककर तलाशी ली। जांच के दौरान भारी मात्रा में शराब बरामद हुई और मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि सतर्कता, प्रभावी सूचना तंत्र और समय पर कार्रवाई से संगठित तस्करी पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।

अब सवाल केवल शराब की बरामदगी का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी है। क्या आबकारी चौकी पर तैनात कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता से किया? क्या चेकिंग में लापरवाही बरती गई या फिर निगरानी व्यवस्था में कोई बड़ी खामी है? इन सवालों के जवाब तलाशना आवश्यक है, क्योंकि यदि सीमा पर ही निगरानी मजबूत हो जाए तो ऐसी खेपें राज्य के भीतर प्रवेश ही नहीं कर पाएंगी।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही नशा और अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना चुके हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की मांग करती हैं। यदि जिम्मेदारी तय नहीं हुई और लापरवाही पर कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार की मंशा और जमीनी अमल के बीच की दूरी बनी रहेगी।

फिलहाल इस पूरे मामले में विकासनगर पुलिस की तत्परता सराहनीय रही, जिसने समय रहते बड़ी खेप पकड़कर तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। वहीं आबकारी विभाग की सीमा चौकी की कार्यप्रणाली अब जांच और जवाबदेही के दायरे में आ गई है।

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