देहरादून में ‘मनोरंजन’ बनाम ‘राजनीति’! राहुल के संवाद से ज्यादा जैस्मिन सैंडल्स के शो का दिखा क्रेज….?

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देहरादून। राजधानी देहरादून में एक ही दिन दो बड़े आयोजन हुए, लेकिन दोनों की तस्वीरें युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं की अलग-अलग कहानी बयां करती नजर आईं। एक ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी छात्रों से संवाद करने पहुंचे, तो दूसरी ओर मशहूर पंजाबी गायिका जैस्मिन सैंडल्स के लाइव शो ने परेड ग्राउंड में ऐसा माहौल बनाया कि हजारों युवा देर रात तक गीतों की धुन पर झूमते रहे। सबसे ज्यादा चर्चा भीड़ को लेकर रही। परेड ग्राउंड में आयोजित जैस्मिन सैंडल्स के कार्यक्रम में युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पूरा मैदान खचाखच भरा दिखाई दिया। कार्यक्रम स्थल पर युवाओं की लंबी कतारें, मोबाइल की फ्लैशलाइट और गानों पर झूमती भीड़ यह संकेत देती रही कि मनोरंजन के प्रति युवाओं का आकर्षण कितना मजबूत है। दूसरी तरफ राहुल गांधी का छात्र संवाद कार्यक्रम भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। कांग्रेस नेताओं ने कार्यक्रम से पहले बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं के पहुंचने का दावा किया था। हालांकि, कार्यक्रम की तस्वीरों और वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने भीड़ अपेक्षा से कम होने का दावा किया, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने आयोजन को सफल बताया।
कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसे युवा भी दिखाई दिए जो वहां मौजूद तो थे, लेकिन उन्हें आयोजन के उद्देश्य या कार्यक्रम की पूरी जानकारी नहीं थी। कई लोग दोस्तों के साथ पहुंचे थे, जबकि कुछ केवल माहौल देखने आए थे। ऐसे दृश्य राजनीतिक आयोजनों में अक्सर देखने को मिलते हैं, जहां समर्थकों के साथ जिज्ञासावश पहुंचे लोग भी भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आज का युवा रोजगार, शिक्षा और भविष्य जैसे मुद्दों पर अपनी राय जरूर रखता है, लेकिन उसकी भागीदारी केवल राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं है। सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रम भी बड़ी संख्या में युवाओं को आकर्षित करते हैं। ऐसे में केवल भीड़ के आधार पर किसी राजनीतिक संदेश की सफलता या असफलता तय करना आसान नहीं होता।
फिर भी देहरादून में एक ही दिन सामने आई दोनों तस्वीरों ने चर्चा जरूर छेड़ दी है। एक तरफ मंच से राजनीतिक संदेश देने की कोशिश हुई, तो दूसरी तरफ संगीत और मनोरंजन ने युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राजनीतिक दलों को युवाओं तक पहुंचने के लिए संवाद के नए तरीके अपनाने होंगे।
फिलहाल राजधानी में यही चर्चा रही कि आखिर युवाओं की पहली पसंद क्या रही—राजनीतिक संवाद या मनोरंजन का रंगीन मंच। दोनों आयोजनों ने अपनी-अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर शहर भर में सबसे ज्यादा चर्चा भीड़ और युवाओं की पसंद को लेकर ही होती रही।