दून मेडिकल कॉलेज का बड़ा फरमान, छुट्टी की भी देनी होगी मेस फीस; NOC अटकी

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देहरादून। उत्तराखंड के प्रतिष्ठित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए एक अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। नए आदेश के तहत अब छात्रों को अपने आधिकारिक अवकाश के दिनों की भी मेस फीस अनिवार्य रूप से भरनी होगी। कॉलेज प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बकाया राशि को चुकाए बिना किसी भी छात्र को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। इस फैसले के कारण पिछले एक महीने से करीब 30 छात्रों की एनओसी अटकी हुई है और उनका नीट पीजी दाखिला गहरे संकट में पड़ गया है।

दरअसल, दून मेडिकल कॉलेज में पिछले कुछ समय से छात्रों की मेस फीस से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सुर्खियों में है, जिसकी प्रशासनिक जांच चल रही है। इसी जांच की आड़ लेकर कॉलेज प्रबंधन ने एमबीबीएस कोर्स पूरा कर चुके शेष 30 छात्रों की एनओसी पर रोक लगा दी है। प्रशासन ने एनओसी जारी करने के बदले छात्रों से उनके पूरे कोर्स के दौरान जमा की गई मेस और अन्य सभी फीस के पुराने रिकॉर्ड मांग लिए थे।

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छात्रों ने जब अपने सभी वैध रिकॉर्ड्स कॉलेज के सामने पेश किए, तो प्रबंधन ने नया पेंच फंसा दिया। कॉलेज का कहना है कि छात्र जितने दिन भी छुट्टी पर थे, उन्हें उस अवधि की भी मेस फीस देनी होगी। आमतौर पर नियम यह है कि यदि कोई छात्र छुट्टी के प्रार्थना पत्र पर अपने सीनियर के हस्ताक्षर करवाकर मेस में जमा करता है, तो उसे उस अवधि के भोजन शुल्क से छूट मिलती है। लेकिन इस बार कॉलेज के अड़ियल रुख के कारण हर छात्र पर 10 से 15 हजार रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ गया है।

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इस गंभीर विवाद पर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी होते ही प्रभावित छात्रों को जल्द से जल्द एनओसी दे दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने हॉस्टल के मुख्य वार्डन की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने का भी दावा किया है।

एनओसी के इस पूरे विवाद ने कॉलेज के भीतर चल रही प्रशासनिक अव्यवस्था को भी उजागर कर दिया है। मेस फीस घोटाला उजागर होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल के सभी वार्डनों को बदल दिया था। नई सूची में शामिल असिस्टेंट वार्डनों ने तो कार्यभार संभाल लिया, लेकिन किसी भी सीनियर प्रोफेसर ने मुख्य वार्डन की जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया।

लंबे समय से मुख्य वार्डन का पद खाली होने के कारण हॉस्टलों में अराजकता की स्थिति है। हाल ही में जब कॉलेज में छात्रों की शिफ्टिंग की जा रही थी, तब मुख्य वार्डन न होने के कारण छात्रों को भारी अव्यवस्था और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

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एनओसी के लिए पिछले एक महीने से कॉलेज के प्रशासनिक भवन के चक्कर काट रहे छात्रों का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने पिछले एक महीने से उनका स्टाइपेंड भी रोक रखा है, जिससे उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ स्टाइपेंड न मिलना और दूसरी तरफ 15 हजार रुपये तक की अतिरिक्त मेस फीस की जबरन वसूली ने छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर दिया है। यदि समय रहते इनकी एनओसी जारी नहीं हुई, तो इन डॉक्टरों का पूरा साल बर्बाद हो सकता है।

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