उत्तराखंड में ‘देवभूमि परिवार कानून’ और ‘द्युत रोकथाम कानून’ को मिली हरी झंडी

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उत्तराखंड की धामी सरकार द्वारा लाए गए दो महत्वपूर्ण विधेयक अब पूरी तरह से कानून के रूप में लागू हो गए हैं। इस साल मार्च में गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान पारित इन विधेयकों को राज्यपाल गुरमीत सिंह की मंजूरी मिलने के बाद विधायी विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

इसके तहत राज्य में ‘देवभूमि परिवार कानून’ और ‘द्युत रोकथाम कानून’ को प्रभावी किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, राज्य में व्याप्त कुरीतियों पर अंकुश लगाने और राज्यवासियों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार यह कड़े कदम उठा रही है। इन कानूनों के लागू होने से जहां एक तरफ डिजिटल डेटा की सुरक्षा और परिवारों की पहचान सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक और संगठित रूप से होने वाले जुए पर पूरी तरह से लगाम कसी जा सकेगी।

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पहचान और डेटा सुरक्षा के नियम

इस नए कानून के अंतर्गत उत्तराखंड के प्रत्येक पात्र परिवार को एक विशिष्ट पहचान संख्या यानी ‘देवभूमि आईडी‘ दी जाएगी। इस योजना के दायरे में केवल वही परिवार आएंगे जो राज्य में पिछले पंद्रह साल या उससे अधिक समय से निवास कर रहे हैं। इस कानून की एक खास बात यह है कि परिवार की मुखिया महिला होगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी सबसे ज्येष्ठ महिला को मुखिया के रूप में दर्ज किया जाएगा और महिला न होने की स्थिति में ही पुरुष को मुखिया माना जाएगा।

इस पूरी योजना के सुचारू संचालन के लिए मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में एक विशेष प्राधिकरण और 10 सदस्यीय शासी निकाय का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही पारिवारिक सूचनाओं और डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए भी सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिसके तहत डेटा चोरी, डेटा सेंटर में घुसपैठ या सिस्टम को नुकसान पहुंचाने पर न्यूनतम 50 लाख रुपये का जुर्माना और 10 वर्ष तक की जेल की सजा तय की गई है।

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जुआ खेलने और खिलाने वालों पर सख्त कार्रवाई

सरकार ने वर्ष 1867 के पुराने कानून में बड़ा संशोधन करते हुए जुए के खिलाफ बेहद दंडात्मक प्रावधान किए हैं, जिसके तहत अब पुलिस को बिना वारंट के भी गिरफ्तार करने का अधिकार दे दिया गया है। नए नियमों के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने पर तीन माह की जेल और पांच हजार रुपये का जुर्माना लगेगा, जबकि किसी घर से जुआघर संचालित करने वालों को दो साल की जेल और 10 हजार रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।

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इसके अलावा, व्यावसायिक रूप से जुआघर चलाने वालों के लिए एक लाख रुपये तक का जुर्माना और पांच वर्ष तक की जेल की सजा मुकर्रर की गई है। इस कानून में सिंडिकेट या गिरोह बनाकर जुए का संचालन करने वालों पर सबसे ज्यादा सख्ती दिखाई गई है, जिसके लिए तीन से पांच वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है, साथ ही पकड़े जाने पर झूठी पहचान बताने वालों को भी तीन वर्ष तक की जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना देना होगा।

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