देहरादून। देहरादून में स्वतंत्रता सेनानी कोटे से एमबीबीएस सीटों पर दाखिले के नाम पर बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। जिला अधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर हुई जांच में पाया गया कि तीन अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बिना किसी फील्ड विजिट और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर जारी कर दिए गए थे।
एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह ने यह जांच रिपोर्ट एडीएम प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर इन तीनों संदिग्ध प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगा दी गई है। साथ ही अभ्यर्थियों के एमबीबीएस दाखिले समेत किसी भी सरकारी लाभ लेने पर रोक लगा दी गई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, तीनों अभ्यर्थी राजीव नगर और तरली कंडोली क्षेत्र के रहने वाले हैं तथा एक ही परिवार से ताल्लुक रखते हैं। शिकायतकर्ता प्रदीप बहुगुणा की शिकायत के बाद जब तहसीलदार सदर ने दोबारा सत्यापन किया, तो बड़ा खुलासा हुआ।
सत्यापन में सामने आया कि आवश्यक और पूरे दस्तावेज न होने के बावजूद ये प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए थे। जांच में संबंधित क्षेत्र के लेखपाल की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसने मौके पर जाए बिना ही घर बैठे रिपोर्ट तैयार कर दी थी। लापरवाही बरतने वाले लेखपाल के खिलाफ अब विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए जिला अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने फर्जीवाड़े और लापरवाही में शामिल कर्मचारियों व अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
डीएम ने स्पष्ट किया कि प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी चेन में जहां भी खामी रही है, उसके जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन अब पूरे सिस्टम की पड़ताल कर रहा है कि आखिर बिना मौका मुआयना किए ये फाइलें कैसे पास होती रहीं।
प्रमाण पत्रों के निलंबन के बाद तीनों अभ्यर्थियों के एमबीबीएस दाखिले अधर में लटक गए हैं। हालांकि, अभी विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीट आवंटन को पूरी तरह से रद्द नहीं किया है।
प्रशासन और मेडिकल कॉलेज की ओर से अंतिम जांच रिपोर्ट हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल विश्वविद्यालय को भेजी जा रही है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन आधिकारिक रिपोर्ट मिलते ही दाखिला रद्द करने पर अंतिम फैसला लेगा।
तहसीलदार सुरेंद्र देव के मुताबिक, मामले की शुरुआती जांच में आवेदनों और दस्तावेजों के साथ टेंपरिंग किए जाने के भी संकेत मिले हैं। ऑनलाइन सिस्टम में जमा कागजों की गहन जांच की जा रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि दून मेडिकल कॉलेज के एक अभ्यर्थी के आवेदन में एक ऐसे प्रमाण पत्र नंबर का जिक्र किया गया है, जो प्रशासनिक रिकॉर्ड में कभी जारी ही नहीं हुआ था। इससे फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह या आंतरिक साठगांठ की आशंका बढ़ गई है।
प्रशासन ने तीनों प्रमाण पत्र धारकों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर अपना पक्ष रखने और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका दिया है। यदि तय समय में सही दस्तावेज पेश नहीं किए गए, तो अभ्यर्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे प्रकरण ने देहरादून प्रशासन की सत्यापन प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब आम आवेदकों के लिए मौका मुआयना और सख्त जांच अनिवार्य है, तो इस मामले में नियमों को दरकिनार कर प्रमाण पत्र कैसे जारी हो गए।

