तारीख 1 परीक्षा -2, क्यों जारी नहीं होता प्रवेश परीक्षाओं का वार्षिक कलेंडर !

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जिनको सरकारी नौकरी मिल जाती है भले ही सिफारिश से मिली हो या तिकड़म भिड़ा कर कुर्सी में बैठने के बाद वो अपने उन दिनो को भूल जाते हैं जब वो बेरोजगार थे या नौकरी के लिए किसी एग्जाम की तैयारी कर रहे थे।

अगर उन्हें याद रहता तो वो जरूर उन छात्रों के साथ खड़े होते जिनके साथ पेपर लीक जैसी घटनाएं हो जाती हैं या फिर दो परीक्षाएं की तारीख एक ही दिन तय हो जाती है। गजब की बात है, जिन काबिल कंधों पर परीक्षा आयोजनों की जिम्मेदारी होती है वो अपने हिसाब से तैयारी करते हैं।

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कंपीटीशन के दौर में जी रहे उन छात्रों के हिसाब से रत्तीभर भी तैयारी नही करते जिन नौजवानों कंधे पर अभिभावकों से लेकर समाज तक सभी कामयाबी का भारीभरकम जुआ रख देते हैं। 7 जून को कुछ ऐसा ही देखने को मिलेगा। पंतनगर विश्वविद्यालय में स्नातक प्रवेश की तैयारी और पॉलिटैक्निक प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को एक ही परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा। दरअसल दोनो आयोजक संस्थाओं ने अपनी-अपनी परीक्षाओं की तारीख एक ही फिक्स की है। जिसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना ही होगा।

मतलब साफ है छात्रों के पास something better then nothing का मौका नहीं बल्कि“करके दिखाओ“ का ही एक मात्र चांस होगा। तय है कि बेचारे छात्र-छात्राओं की एक परीक्षा का शुल्क तो गई भैस पानी में हो गया है। क्योंकि परीक्षा दो हैं जबकि तारीख एक । या तो पॉलीटेक्निक प्रवेश का एक्जाम दें या पंतनगर यूनिवर्सिटी में प्रवेश का। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक UBTER के सचिव को इसका पता ही नहीं है कि 07 जून2026 को ही पंतनगर विश्वविद्यालय ने भी स्नातक प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया है।

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बहरहाल जब प्रवेश परीक्षा के फार्म भरवाए गए थे तब तारीख का डिसाइड किसी भी संस्था ने नहीं किया। न G.B.P.U. ने और ना ही UBTER ने। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा महकमा, प्रवेश परीक्षाओँ का वार्षिक कलेंडर जारी क्यों नहीं करता ? ताकि राज्य के छात्र-छात्राओं के पास भरपूर विकल्प रहें! और वे हर उस परीक्षा में शामिल हो पाएं जिसकी वो तैयारी कर रहे हैं।

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इससे अभिभावकों के पैसे बर्बाद होने से तो बचेंगे ही, छात्र-छात्राओं के पास भी पूरे मन चाहे विकल्प होंगे। लिहाजा जरूरत है वार्षिक कलेंडर तैयार करने की ताकि पढ़ने वाले बच्चों के सपने जिंदा रहें। क्योंकि कवि अवतार सिंह पाश ने लिखा था, “बहुत खतरनाक होता है सपनों का मर जाना”

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