देहरादून में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य की वर्तमान सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए साफ़ कर दिया है कि सत्ता के किसी भी प्रकार के दबाव या प्रभाव से विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने उत्तराखंड शासन व्यवस्था पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में चल रही दोहरी नीति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गोदियाल का यह बयान लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा और राजनीतिक दलों के बीच समान व्यवहार की मांग को लेकर आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी जनता के बुनियादी मुद्दों को पूरी मजबूती और मुखरता के साथ उठाती रहेगी, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी प्रशासनिक चुनौती का सामना क्यों न करना पड़े।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कार्यशैली पर सीधा पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहे अधिकारियों की हर गतिविधि पर विपक्ष की पैनी नज़र बनी हुई है। उन्होंने भेदभाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ एक तरफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन पर एयरपोर्ट से लेकर पूरे शहर में जगह-जगह नियमों को ताक पर रखकर पोस्टर और बैनर लगाए गए, यहाँ तक कि पार्टी मुख्यालय के सामने की मुख्य सड़क को भी बाधित कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ कुछ महीने पहले कांग्रेस के कार्यक्रम से ठीक पहले प्रशासन और नगर निगम ने सारे झंडे और बैनर जबरन हटवा दिए थे। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि क्या नियम-कानून सिर्फ विपक्षी दलों को रोकने के लिए ही बनाए गए हैं और सत्ता पक्ष के लिए इनका कोई वजूद नहीं है।
भाजपा की अंदरूनी कलह
गणेश गोदियाल ने सत्ताधारी दल को नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा को कांग्रेस के आंतरिक मामलों की चिंता छोड़ देनी चाहिए और सबसे पहले अपने संगठन के भीतर मची खींचतान और आपसी विवादों पर जनता को जवाब देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस राजनीतिक दल के अंदर असंतोष और आपसी कलह खुलकर सड़कों पर आ रही हो, उसके नेताओं को लोकतंत्र की दुहाई देने या कानून व्यवस्था की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने दोहराया कि प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग करके विपक्ष का मनोबल नहीं तोड़ा जा सकता और वे जनहित के संघर्ष को और तेज करेंगे।

