देहरादून के राजपुर रोड स्थित एक मदरसे में बाल आयोग के औचक निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं और सुरक्षा संबंधी खामियां सामने आई हैं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने पाया कि मदरसे के बेसमेंट को बिना अनुमति के हॉस्टल में बदल दिया गया था, जहाँ बिहार और अन्य राज्यों से आए करीब 85 बच्चों को क्षमता से अधिक संख्या में ठूंसकर रखा गया था। हैरानी की बात यह है कि इस मदरसा बिल्डिंग का न तो नक्शा पास है और न ही इसके पास फायर सेफ्टी की एनओसी उपलब्ध है, जिसे देखते हुए आयोग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मदरसे को नोटिस जारी कर दिया है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बच्चों का मानसिक विकास
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि बच्चों को बेसमेंट के फर्श पर बिस्तर डालकर सुलाया जा रहा था, जहाँ बरसात में पानी भरने का खतरा हमेशा बना रहता है। बाल आयोग की अध्यक्ष ने बच्चों को दी जा रही शिक्षा और उनके मानसिक विकास को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को किस तरह का वातावरण दिया जा रहा है और धर्म के नाम पर उनकी सोच को कैसे प्रभावित किया जा रहा है, यह एक अत्यंत गंभीर विषय है, जिसकी गहन जांच होनी आवश्यक है।
अवैध संचालन और हॉस्टल पंजीकरण की मांग
मदरसे में मिली खामियों को देखते हुए आयोग ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पिछले छह माह की सीसीटीवी फुटेज खंगालने के निर्देश दिए हैं ताकि वहां होने वाली गतिविधियों और आने-जाने वाले लोगों का पता चल सके। इस घटना के बाद आयोग ने राज्य में चल रहे सभी प्रकार के हॉस्टलों, चाहे वे मदरसों में हों या कोचिंग सेंटर में, उनके लिए अनिवार्य पंजीकरण और समान नियमावली बनाने की मांग उठाई है। आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि बाहरी राज्यों से इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के यहाँ आने के कारणों की भी विस्तृत जांच कराई जाए।

