सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: डॉक्टर की मृत्यु के बाद भी वारिसों पर चलेगा मेडिकल लापरवाही का केस

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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी डॉक्टर पर मेडिकल लापरवाही का आरोप है, तो उनकी मृत्यु के बाद भी उनके कानूनी वारिसों के खिलाफ मुकदमा जारी रखा जा सकता है। अदालत के अनुसार, डॉक्टर की लापरवाही से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की जिम्मेदारी उनके वारिसों की होगी, लेकिन यह जिम्मेदारी केवल उतनी ही संपत्ति तक सीमित रहेगी जो उन्हें मृतक से विरासत में मिली है। यह निर्णय उपभोक्ता मंचों के समक्ष लंबित उन मामलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जहाँ प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर का निधन हो जाता है।

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वारिसों की जिम्मेदारी और सीमा

शीर्ष अदालत ने यह साफ कर दिया है कि डॉक्टर के निधन के बाद उनके परिवार (जैसे पत्नी और बेटे) को पक्षकार बनाया जा सकता है। हालांकि, राहत पाने का अधिकार और मुआवजे का भुगतान केवल मृतक डॉक्टर की उस संपत्ति से किया जाएगा जो वारिसों को मिली है। इसका अर्थ यह है कि वारिसों को अपनी व्यक्तिगत संपत्ति से हर्जाना देने की जरूरत नहीं होगी।

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मुकदमे का हक यानी राहत पाने का अधिकार

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एस चांदुरकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि मेडिकल लापरवाही के मामले में ‘मुकदमा करने के अधिकार’ का मतलब कानूनी कार्यवाही के जरिए राहत पाने का हक है। अदालत ने माना कि डॉक्टर की मृत्यु हो जाने पर भी पीड़ित का राहत पाने का अधिकार खत्म नहीं होता। यह फैसला तीन दशक पुराने एक मामले की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें एक ऑपरेशन के बाद मरीज की आँखों की रोशनी चली गई थी।