गाड-गधेरे और गंगा यमुना जैसी तमाम नदियों के माएके में नई पनबिजली परियोजनाएं नहीं लगेगी। केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पानी से बिजली बनाने के धंधे पर रोक लगा दी है। हालांकि ये फैसला गंगा नदी पर लगने वाले नए प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा।
बहरहाल केंद्र सरकार ने गंगा की अविरलता और निर्मलता को प्राथमिकता दी है। बताया जा रहा है कि पहले जिन 28 परियोजनाओं को शुरू करने का प्रस्ताव था, उनमें से अब केवल 7 चालू परियोजनाओं पर ही बिजली बनाने का काम होगा। बाकी 21 परियोजनाओं को रद्द कर दिया गया है।
यह ऐतिहासिक निर्णय जल शक्ति मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का साझा फैसला है। तीनों मंत्रालयों की उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह सहमति बनी कि गंगा बेसिन की ईकोलॉजी को बचाने के लिए नई बिजली परियोजनाओं पर रोक जरूरी है.
गौरतलब है कि उत्तराखंड में गंगा और उसकी सहायक नदियों पर पहले कुल 28 पनबिजली परियोजनाओं का प्रस्ताव था। जिनमे से 7 परियोजनाएं वर्तमान में निर्माणाधीन हैं या चालू हैं। केंद्र के नए फैसले के बाद अब सिर्फ इन्हीं 7 परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा. शेष 21 परियोजनाओं पर भविष्य में कोई काम नहीं होगा।
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार ने गंगा के ‘राष्ट्रीय नदी’ के दर्जे का ख्याल रखते हुए फैसला लिया है। दरअसल ‘नमामि गंगे’ मिशन के तहत गंगा की अविरल धारा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। जबकि बांधों और बैराजों के कारण गंगा की कुदरती धारा बाधित होती है। जिससे नदी का पारिस्थितिकीय तंत्र प्रभावित होता है। केंद्र सरकार के इस फैसले का पर्यावरण संगठनों और गंगा संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने स्वागत किया है।

