नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो NCB ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित और अत्यधिक उत्तेजक मादक पदार्थ ‘कैप्टागन’ (जिसे ‘जिहादी ड्रग’ भी कहा जाता है) की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस देशव्यापी ऑपरेशन ‘रेजपिल’ के तहत एजेंसी ने उत्तराखंड से एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भारत में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में इस खतरनाक ड्रग्स की बरामदगी के बाद शुरू की गई जांच का हिस्सा है।
इससे पहले एनसीबी ने इस मामले में एक सीरियाई नागरिक अलाब्रास अहमद को गिरफ्तार किया था, जिसने पूछताछ में खुलासा किया कि यह ड्रग देहरादून के सहसपुर स्थित ‘ग्रीन हर्बल’ नामक फैक्ट्री में एक अन्य सीरियाई नागरिक की मदद से तैयार की जा रही थी। इस इनपुट के आधार पर एनसीबी की टीम ने शनिवार रात देहरादून की उक्त फैक्ट्री पर छापेमारी की, जहां से अत्याधुनिक मशीनें, रसायन, कैप्सूल और पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई। अब केंद्रीय एजेंसी इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों और भारत के भीतर फैली इसकी सप्लाई चेन को पूरी तरह खंगालने में जुटी है।
नकली दवाओं के निर्माण से ड्रग लैब बनने तक का सफर
देहरादून के सहसपुर में स्थित ‘ग्रीन हर्बल’ फैक्ट्री का आपराधिक इतिहास रहा है, जहां पहले साधारण नकली दवाएं बनाई जाती थीं, लेकिन अब यह परिसर अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का एक बड़ा अड्डा बन चुका था। इससे पहले 6 दिसंबर 2024 को भी उत्तराखंड पुलिस ने यहाँ नकली दवाओं के निर्माण का भंडाफोड़ कर इसे सील किया था, परंतु बाद में कोर्ट के आदेश पर इसे दोबारा खोल दिया गया था। इस बार एनसीबी की जांच में सामने आया कि फैक्ट्री मालिक ने अपने पुराने अवैध नेटवर्क को खत्म करने के बजाय उसे और अधिक विस्तार दे दिया। उसने पूरे परिसर को एक हाई-टेक ड्रग लैब में तब्दील कर दिया, जहां बेहद गोपनीयता के साथ महज दो कमरों और तीन शेड से ढके हिस्से में कैप्टागन जैसी घातक ड्रग का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा था ताकि किसी को कोई संदेह न हो।
₹50,000 प्रतिदिन का किराया
इस पूरे अवैध ड्रग ऑपरेशन में फैक्ट्री मालिक की भूमिका भी बेहद चौंकाने वाली सामने आई है, जो ड्रग्स के निर्माण के लिए अपने परिसर का उपयोग करने देने के एवज में ₹50,000 प्रतिदिन के हिसाब से भारी-भरकम किराया वसूल रहा था। जांच में यह भी पता चला है कि वह पहले से ही दो अन्य ड्रग तस्करी के मामलों में विभिन्न जांच एजेंसियों के रडार पर था।
फैक्ट्री परिसर से भारी मात्रा में मशीनरी, खतरनाक रसायन और पैकेजिंग सेटअप का मिलना यह साफ दर्शाता है कि यहाँ बेहद संगठित तरीके से अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट काम कर रहा था। इस बेहद गंभीर मामले का खुलासा होने के तुरंत बाद एनसीबी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर को एक बार फिर से सील कर दिया है और इस अवैध धंधे में शामिल अन्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए गहनता से अपनी जांच शुरू कर दी है।

