अमेरिका-इरान शांति समझौता: मध्य पूर्व में 107 दिनों बाद थमेगा युद्ध, भारत को मिलेगी बड़ी आर्थिक राहत

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मध्य पूर्व में पिछले 107 दिनों से जारी खूनी संघर्ष और भारी तनाव के बाद अब शांति की बहाली होने जा रही है. वाशिंगटन में हुई 14 घंटे से अधिक की मैराथन कूटनीतिक वार्ता के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने पर ऐतिहासिक सहमति बन गई है।

इस महत्वपूर्ण शांति समझौते पर आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसके तुरंत बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल दिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे पूरे क्षेत्र में शांति लाने वाला कदम बताया है, जिससे दुनिया को तेल की आपूर्ति फिर से सामान्य हो सकेगी।

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दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि समझौते के तहत ईरान की प्रतिबद्धताएं पूरी तरह शर्तों पर आधारित हैं और लेबनान पर इजरायली हमलों को रोकना अमेरिका की जिम्मेदारी है। इस ऐतिहासिक फैसले का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वागत किया है. हालांकि, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता इजरायल के लिए बाध्यकारी नहीं है और उनकी सेना क्षेत्र में तैनात रहेगी।

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इस शांति करार से वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत को भी बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। हॉर्मुज जलमार्ग खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे भारत में परिवहन और उत्पादन लागत घटेगी और आम जनता को महंगाई से बड़ी निजात मिलेगी।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी, जिससे देश का आयात बिल कम होगा और चालू खाते का घाटा भी घटेगा. समुद्री मार्ग सुरक्षित होने से भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा पहुंचेगा, जबकि उर्वरक, गैस और तेल की आपूर्ति सुधरने से देश के उद्योग पूर्व स्तर पर लौट सकेंगे।

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इस ऐतिहासिक फैसले के बाद शेयर बाजार भी झूम उठा है; निवेशकों के भारी उत्साह के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बड़ी बढ़त के साथ बंद हुए हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है।

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