स्वास्थ्य विभाग में फिर घोटाले की गूंज, मेडिकल कॉलेज उपकरणों से लेकर एमआरआई मशीन खरीद तक उठे पर सवाल…. स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश…

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विभाग और घोटालों का पुराना रिश्ता अब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार मामला मेडिकल कॉलेजों में खरीदे गए उपकरणों और करोड़ों रुपये की एमआरआई मशीनों की खरीद से जुड़ा हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा मेडिकल कॉलेजों में खरीदी गई मशीनों की जांच के आदेश दिए जाने के बाद कई पुराने मामलों की फाइलें भी खुलने लगी हैं। माना जा रहा है कि यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से हुई तो स्वास्थ्य विभाग में हुए कई बड़े खेल सामने आ सकते हैं।
दरअसल, राज्य में कुछ समय पहले आपदा प्रबंधन बजट से तीन एमआरआई मशीनें खरीदी गई थीं। उस दौरान कांग्रेस ने इस खरीद पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। आरोप लगाए गए थे कि करोड़ों रुपये की मशीनें नियमों को ताक पर रखकर खरीदी गईं और जिन मशीनों को अत्याधुनिक बताकर प्रस्तुत किया गया, उनके चीन निर्मित होने की चर्चा भी जोर पकड़ने लगी थी। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि मशीन सप्लाई करने वाली कंपनी पर पहले से अनियमितताओं के आरोप रहे हैं, इसके बावजूद उसे काम दे दिया गया।
हालांकि उस समय मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित होकर रह गया और धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया। लेकिन अब मेडिकल कॉलेजों में उपकरण खरीद से जुड़े नए मामलों के सामने आने के बाद खरीद प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो कई मेडिकल कॉलेजों में उपकरणों की खरीद में गुणवत्ता, कीमत और टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप हैं कि बाजार कीमत से कहीं अधिक दरों पर उपकरण खरीदे गए और कई मामलों में तकनीकी मानकों की अनदेखी भी की गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में मेडिकल कॉलेजों में खरीदी गई मशीनों और उपकरणों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जांच का दायरा यदि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तक बढ़ा तो कई बड़े अधिकारियों और आपूर्ति से जुड़ी कंपनियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। विपक्ष का कहना है कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो यह सीधे जनता के स्वास्थ्य और सरकारी संसाधनों के साथ खिलवाड़ है। विपक्ष ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच की मांग की है।
अब सबकी निगाहें इस जांच पर टिकी हैं कि क्या यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या फिर स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से जमी धूल हटाकर बड़े खुलासे सामने आएंगे। यदि जांच निष्पक्ष हुई तो स्वास्थ्य विभाग में मशीन खरीद के नाम पर हुए करोड़ों के खेल से पर्दा उठना तय माना जा रहा है।