उत्तराखंड राज्य के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र के दौरान कई जगहों पर एक भी नए छात्र का दाखिला न होने के कारण स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। छात्रों की अनुपस्थिति के चलते प्रदेश के दर्जनों विद्यालयों में ताले लटकने की नौबत आ गई है, जिसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने अब कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने निर्णय लिया है कि जिन स्कूलों में शून्य नामांकन है, वहां के अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि जहां छात्र संख्या शून्य या अत्यंत कम है, वहां से शिक्षकों को अनिवार्य रूप से दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा और जिन स्कूलों में शिक्षक अधिक व छात्र कम हैं, वहां भी अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा।
पौड़ी और यमकेश्वर क्षेत्र में स्कूलों पर लगे ताले
इस नई नीति के तहत पौड़ी जिले में शून्य छात्र संख्या वाले स्कूलों से 13 शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया को आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया गया है। विशेष रूप से यमकेश्वर क्षेत्र के नांद और पैंया जैसे गांवों के विद्यालयों में एक भी नए छात्र का दाखिला नहीं होने के कारण प्रशासन को इन स्कूलों को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लेना पड़ा है।
इन क्षेत्रों के प्रभावित शिक्षकों को अब उन विद्यालयों में स्थानांतरित किया जा रहा है जहां शिक्षकों की कमी है, ताकि उपलब्ध मानव संसाधन का सही उपयोग किया जा सके।
विभिन्न जिलों में स्कूलों के बंद होने की स्थिति
शिक्षकों और छात्रों का यह असंतुलन केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है। चालू सत्र में छात्र संख्या शून्य होने के कारण यूएसनगर में तीन, बागेश्वर में दो और पिथौरागढ़ में भी कई सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां छात्र न होने के कारण 21 प्राथमिक और 9 उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लग चुके हैं। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा निदेशक डॉ. एमके सती ने राज्य के सभी जिलों से शून्य छात्र संख्या वाले स्कूलों और वहां तैनात सरप्लस शिक्षकों का एक विस्तृत ब्योरा तलब कर लिया है, ताकि आगे की उचित कार्रवाई की जा सके।

