31 साल तक रहा ‘मुजरिम’,अब बना कानून का ‘रखवाला’…कहानी ‘कटघरे से काले कोट तक की’

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31 साल जेल में गुजारने के बाद, राजीव गांधी हत्याकांड का दोषी एजी पेरारिवलन अब वकील बन गया है। पेरारिवल ने तमिलनाडू और पुड्डुचेरी की बार कॉउंसिल में अपना नामांकन करवाया है। बहरहाल जब पेरारिवलन पर पूर्वप्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में शामिल होने का दाग लगा था.. तब पेरारिवलन नया नया जवान हुआ था।

अभी किशोर अवस्था से जवानी की ओर कदम ही बढाया था कि, महज 19 साल की उम्र मे ही उम्रकैद की सजा काटने के लिए जेल की सलाखों के पीछे चला गया। पूरी जवानी जेल में गुजारने के बाद अब 54 साल का अधेड़ पेरारिवलन जेल से बहार आया है। लेकिन अब वो मुजरिम नहीं बल्कि हाथ में कानून की डिग्री लेकर लौटा है। ये है भारतीय संविधान की खूबसूरती।

खैर अब 54 साल की उम्र में पेराविलन काला कोट पहनकर उन अदालत में कानून की दुहाई देगा किसी के लिए इंसाफ की मांग करेगा जहां से कभी उसे उसके गुनाह की सजा सुनाई गई थी।

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AG पेरारिवलन की कहानी फिल्मी नहीं, हकीकत है। कहते हैं कि सितारे कब चमक जांए और कब गर्दिश में चले जाएं कोई नहीं जानता .. 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में हुए उस धमाके को कोई नहीं भूलता जिस धामाके ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को हमसे छीन लिया था। उन्ही की हत्या की साजिश केस में गिरफ्तार हुआ था 19 साल का AG पेरारिवलन।

पेरारिवलन पर आरोप था – बम बनाने के लिए 9 वोल्ट की बैटरी खरीदने का। हाई प्रोफाइल हत्या मामले में पेरिवलन की पूरी जवानी जेल की चारदीवारी और कानूनी लड़ाई में गुजरी है। हालांकि 2022 में सुप्रीम कोर्ट से रिहाई का फरमान सुनाया गया था । बहरहाल इस अप्रैल महीन की 27 तारीख को पेरारिवलन ने तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में एडवोकेट के तौर पर नामांकन कराया। अब वो मद्रास हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करेगा।

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पेरारिवलन की माने तो अब वो उन कैदियों की पैरवी करेगा जो सालों से जेल में बंद हैं। जिनकी सुनवाई तक नहीं हो रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पेरिवलन ने कहा मैं उस दर्द को समझता हूं लिहाजा अब मैं उस पीड़ा की आवाज बनूंगा और कानूनी मरहम लगाकर राहत पहुंचाने का काम करूंगा।

आपको बता दें कि एजी पेरारिवलन अब एडवोकेट है लेकिन 1991 में राजीव गांधी हत्याकांड के वक्त जब उसकी गिरफ्तारी हुई थी तब उसकी उम्र महज 19 साल की थी। 1998 में TADA कोर्ट से उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी..जिसे लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था। ऐसे में 31 साल बाद साल 2022 में एजी पेरारिवलन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेल से रिहा हुआ। और अब साल 2026 में पेरारिवलन सम्मानित वकील बन गया है।

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हालाकिं पेरारिवलन के वकील बनने पर बहस छिड़ गई है एकक पक्ष कहता है: “उसने सजा काट ली। अब वो वकालत का हकदार है।” दूसरा पक्ष सवाल उठाता है: “क्या देश के PM की हत्या के दोषी को कोर्ट में दलील देने का नैतिक हक है?”
हालांकि तमिलनाडु बार काउंसिल का कहना है कि “कानूनन कोई रोक नहीं है। रिहा होने के बाद हर नागरिक को प्रोफेशन चुनने का हक है।”

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