उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 के लिए तदर्थ बोनस देने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है। औद्योगिक विकास सचिव विनय शंकर पांडेय ने 5 नवंबर 2026 को सभी प्रशासनिक विभागों के उच्च अधिकारियों को पत्र जारी कर वित्तीय स्थिति के अनुसार बोनस भुगतान की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
वित्त विभाग के शासनादेश के तहत अब सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों को अपने स्तर पर निर्णय लेने का अधिकार दे दिया गया है। यदि संबंधित संस्थान अपने वित्तीय संसाधनों से बोनस का खर्च उठाने में सक्षम हैं, तो वे कर्मचारियों को तदर्थ बोनस दे सकेंगे। इसके लिए उन्हें वित्त विभाग की दोबारा अलग से सहमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
जारी आदेश के मुताबिक, तदर्थ बोनस का लाभ समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के साथ-साथ समूह ‘ख’ के अराजपत्रित कर्मचारियों को मिलेगा। इसके लिए 4800 रुपये तक के ग्रेड पे (लेवल-8) की सीमा तय की गई है। कर्मचारियों को अधिकतम 30 दिन की परिलब्धियों के आधार पर 7,000 रुपये तक का तदर्थ बोनस मिलेगा।
बोनस की पात्रता के लिए कर्मचारियों का 31 मार्च 2026 को सेवा में होना और इस तिथि तक कम से कम 6 महीने की संतोषजनक सेवा पूरी करना अनिवार्य है। जिन कर्मचारियों ने पूरे साल के बजाय 6 महीने से अधिक काम किया है, उन्हें अवधि के अनुपात में बोनस दिया जाएगा।
दैनिक वेतनभोगी और कैजुअल कर्मचारियों को भी इसमें राहत दी गई है। बीते तीन सालों में तय कार्यदिवस (240 या 206 दिन) पूरे करने वाले दैनिक वेतनभोगियों को 1,184 रुपये तक का बोनस मिलेगा। हालांकि, जिन कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे लंबित हैं, उनका बोनस मामला सुलझने तक रुका रहेगा।
पात्र कर्मचारियों को बोनस की यह राशि सीधे नकद रूप में उनके वेतन मद के तहत दी जाएगी। राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शासन का आभार जताया है।

