नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में बरसाती नाले की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और उसे बेचने के गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जिला अधिकारी देहरादून व प्रभारी वनाधिकारी को 27 जुलाई तक शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता प्रभु दयाल शर्मा ने आरोप लगाया कि विकासनगर के ईस्ट होप टाउन क्षेत्र के उमेदपुर में करीब 15 बीघा सरकारी भूमि पर बिल्डर्स ने अतिक्रमण कर बिल्डिंगें बना लीं और फिर लोगों को बेच दीं। जांच समिति ने अतिक्रमण की पुष्टि की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कोर्ट ने सख्ती से पूछा कि अतिक्रमण हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए। अदालत ने विकास निगम को भी अतिक्रमण हटाने के निर्देश देने की मांग पर गौर किया। जनहित याचिका में कहा गया कि शिकायत के बाद गठित जांच समिति ने सरकारी नाले की भूमि पर अतिक्रमण की रिपोर्ट दी थी।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अतिक्रमण हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले को गंभीरता से लिया और 27 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी।इस दौरान कोर्ट ने पूछा कि अतिक्रमण हटाने में अब तक कितनी प्रगति हुई है। हाईकोर्ट ने वन उपज रक्षकों के वेतन-भत्ते के पुनर्गठन के मामले में भी आदेश जारी किए। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई की।

