देहरादून। उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को अगले महीने महंगे बिजली बिल का बड़ा झटका लगने जा रहा है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को उपभोक्ताओं से 18.97 करोड़ रुपये के बकाया फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट की वसूली करने की हरी झंडी दे दी है। यह अतिरिक्त राशि उपभोक्ताओं द्वारा सितंबर महीने में की गई बिजली खपत के आधार पर अक्टूबर के बिल में जुड़कर आएगी।
विद्युत नियामक आयोग के अनुसार, इस साल जनवरी से मार्च की तिमाही के दौरान यूपीसीएल को अतिरिक्त बिजली खरीद के लिए 342.95 करोड़ रुपये चुकाने पड़े थे। इसके मुकाबले निगम मार्च से मई के दौरान उपभोक्ताओं से केवल 323.98 करोड़ रुपये ही वसूल सका था। इस घाटे की भरपाई के लिए आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने यूपीसीएल को 18.97 करोड़ रुपये की अंतरिम वसूली की अनुमति दी है।
नियामक आयोग ने औद्योगिक उपभोक्ताओं को राहत देते हुए यूपीसीएल को हर महीने वसूले जाने वाले फ्यूल चार्ज का ब्योरा महीने की 28 तारीख तक अनिवार्य रूप से अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। उद्योगों की शिकायत थी कि महीने के बीच में फ्यूल चार्ज तय होने से उनका बजट बिगड़ जाता है। इसके साथ ही आयोग ने पिछली बार समायोजन में देरी करने पर यूपीसीएल प्रबंधन को कड़ी फटकार भी लगाई।
बिजली दरों में बढ़ोतरी के साथ ही राज्य सरकार ने बिजली ग्रिड की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। उत्तराखंड की बिजली ग्रिड को हैकर्स और साइबर हमलों से बचाने के लिए पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड के तहत 19.44 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जनरेशन सिक्योरिटी एंड नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर’ स्थापित किया जाएगा।
ग्रिड की साइबर सुरक्षा के लिए तैयार होने वाले इस अभेद्य ढांचे का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार के पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से अनुदान के रूप में मिलेगा, जबकि शेष 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केंद्र से मिलने वाले इस अनुदान का कोई भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड के बिजली ढांचे को पहले ही ‘क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया जा चुका है। यह नया सिक्योरिटी सेंटर 24 घंटे एक डिजिटल पहरेदार की तरह काम करेगा, जिससे यदि कोई हैकर ग्रिड सिस्टम में सेंध लगाने या नेटवर्क में गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा। नियामक आयोग ने पिटकुल को इस सुरक्षा परियोजना को 18 से 24 महीनों के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

