उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग सख्त: पुलिस से पिछले 3 वर्षों में गायब हुए बच्चों का पूरा ब्योरा किया तलब

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उत्तराखंड में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समन्वय बैठक में पुलिस विभाग से पिछले तीन वर्षों के दौरान दर्ज हुए सभी गुमशुदा बच्चों का पूरा विवरण और उनकी वर्तमान स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।

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आयोग कार्यालय में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान राज्य में बच्चों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, गुमशुदगी, बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल यौन शोषण, किशोर अपराध और सामाजिक उत्पीड़न जैसे अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।

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आयोग ने पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे पिछले तीन साल में गायब हुए बच्चों का पूरा रिकॉर्ड, उनके लापता होने के मुख्य कारण और वर्तमान में उन्हें ढूंढने के लिए किए गए प्रयासों की स्थिति जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग की ट्रैकिंग आईडी प्रणाली के जरिए स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उनके पुनर्वास के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई।

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बैठक में यह भी बड़ा निर्णय लिया गया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों की सही निगरानी और उनके पुनर्वास की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बाल कल्याण समितियों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच सूचना साझा करने के तंत्र को और मजबूत किया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा असुरक्षित न रहे।