देहरादून।उत्तराखंड में अल्पसंख्यक छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्तियों में एक बहुत बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। प्रदेश के 26 शिक्षण संस्थानों ने मिलकर कुल 1709 फर्जी छात्रों के नाम पर केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति के रूप में 1.35 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अवैध रूप से हड़प ली है।
संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट में इस बड़े महाघोटाले की पुष्टि होने के बाद प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी दोषी संस्थानों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज करने के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं। इस संवेदनशील मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. मधुकर पराग धकाते ने बताया कि छात्रवृत्ति योजना में गड़बड़ी का यह पूरा मामला पहली बार जून 2025 में सामने आया था।
इसके बाद राज्य सरकार के कड़े निर्देशों पर अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए एक संयुक्त जांच समिति का गठन कर मामले की जांच बैठा दी थी। जांच समिति ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित कुल 92 निजी शिक्षण संस्थानों को अपनी जांच के दायरे में लिया था, जिसकी अंतिम रिपोर्ट अब शासन को सौंप दी गई है।
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, संयुक्त जांच समिति की इस रिपोर्ट में साफ हुआ है कि निजी कॉलेजों ने अपने यहां फर्जी लाभार्थी छात्र दिखाकर सरकार की इस महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजना की राशि को पूरी तरह से हड़प लिया। इस घोटाले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध रूप से हड़पी गई कुल रकम का आधा से अधिक हिस्सा अकेले हरिद्वार जिले के शिक्षण संस्थानों द्वारा ठिकाने लगाया गया है।
छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा करने के सबसे ज्यादा गंभीर मामले हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में ही देखने को मिले हैं। जांच के आंकड़ों के मुताबिक, हरिद्वार जिले में कुल 32 निजी शिक्षण संस्थानों की सघन जांच की गई थी, जिनमें से 19 संस्थानों में बड़े स्तर पर गड़बड़झाला और अनियमितता पाई गई है।
इन दोषी संस्थानों ने अपने यहां कुल 1002 फर्जी लाभार्थी छात्र दिखाए और उनके नाम पर सरकारी बजट को पूरी तरह से ठिकाने लगा दिया। सरकार अब इन दागी संस्थानों से सर्वाधिक 68.80 लाख रुपये की रिकवरी यानी वसूली करने की तैयारी कर चुकी है। हरिद्वार के बाद ऊधमसिंह नगर में भी इस घोटाले की जड़ें काफी गहरी पाई गई हैं, जहां कुल 19 संस्थानों की जांच की गई थी।
इस जांच के दौरान जिले में सात पूर्णतः फर्जी संस्थान संचालित होते मिले और उनके रिकॉर्ड में 456 फर्जी लाभार्थी छात्र पाए गए हैं। इस बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद जांच टीम ने संस्तुति की है कि इन दोषी कॉलेजों से कुल 27.68 लाख रुपये की सरकारी धनराशि वसूली जाएगी।
इसके अतिरिक्त, भौतिक सत्यापन की कार्रवाई के दौरान जांच टीम को कई चिन्हित संस्थान मौके पर पूरी तरह से बंद भी मिले हैं। इस घोटाले का जाल राजधानी देहरादून और नैनीताल जैसे बड़े जिलों में भी व्यापक रूप से फैला हुआ नजर आया है। नैनीताल जिले के दो शिक्षण संस्थानों में सीधे तौर पर घोटाला सामने आया है, जहां संचालकों ने 140 फर्जी लाभार्थी छात्रों के नाम पर 21.65 लाख रुपये की छात्रवृत्ति की रकम को अवैध रूप से ठिकाने लगा दिया।
वहीं देहरादून के भी एक बड़े संस्थान ने चालाकी से 108 फर्जी छात्रों के नाम दर्ज किए और केंद्र सरकार को सीधे 16.74 लाख रुपये का तगड़ा चूना लगा दिया। जांच समिति ने इस घोटाले की जद में आए पौड़ी जिले में भी कार्रवाई की है, जहां एक मामले में 18 हजार 300 रुपये की सरकारी वसूली तय की गई है।
हालांकि, राहत की बात यह रही कि अन्य राज्यों से बेहद अवैध रूप से जमा किए गए कुल 108 फर्जी आवेदनों को विभाग की सजगता के कारण समय रहते पकड़ लिया गया, जिससे एक और बड़ी सरकारी रकम का नुकसान होने से बच गया।
अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के साथ ही इन सभी दोषी संस्थानों को ब्लैकलिस्ट करने और इनसे पाई-पाई वसूलने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सरकार के इस कड़े कदम से प्रदेश के शिक्षा और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

