जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण भारत की जीवनदायिनी नदियों गंगा, कावेरी और गोदावरी पर एक गंभीर संकट मंडराने लगा है। आईआईआईटी हैदराबाद के हाइड्रोक्लाइमेटिक रिसर्च ग्रुप और कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के ताजा वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, इन प्रमुख नदियों के पानी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘रिवराइन हीटवेव’ या ‘नदी की लू’ कहा जाता है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गंगा के मध्य प्रवाह क्षेत्र में साल 2009 से 2025 के बीच पानी का औसत तापमान करीब 1.88 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है, जो कि पहले की वार्षिक औसत दर से लगभग दोगुनी रफ्तार है। शोध पत्रिका ‘साइंस एडवांसेज’ में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, पिछले चार दशकों में दुनिया की 78.8 प्रतिशत नदियों में ऑक्सीजन का स्तर काफी घटा है।
आईआईआईटी हैदराबाद की वैज्ञानिक डॉ. रेहाना शैक ने चेतावनी दी है कि पानी का तापमान महज एक डिग्री सेल्सियस बढ़ने से भी उसमें घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर लगभग 2.3 प्रतिशत तक कम हो सकता है, जो मछलियों, जलीय कीटों और संपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद घातक है।
यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी गति से जारी रहा, तो साल 2090 तक गंगा के आधे से अधिक हिस्से में ‘लू’ की घटनाएं अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे जैव विविधता, कृषि, पेयजल की उपलब्धता और मत्स्य पालन पर सीधा व विनाशकारी असर पड़ेगा।
इस विकराल संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने नदियों के किनारे ग्रीन बेल्ट विकसित करने, प्रदूषण को रोकने, प्राकृतिक जल प्रवाह बनाए रखने और भूजल पुनर्भरण क्षेत्रों के संरक्षण पर तत्काल विशेष जोर दिया है।

