उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद आकर्षक कदम उठाया है। इसके तहत ‘दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना’ के अंतर्गत नए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और पर्यटन विभाग की ओर से इच्छुक नागरिकों से आवेदन मांगे जा रहे हैं।
ग्रामीण और पहाड़ी अंचलों में आर्थिक मजबूती लाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में सरकार द्वारा ₹15 लाख तक की भारी कैपिटल सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है। इसके साथ ही, बैंक से लोन लेने वाले लाभार्थियों को पांच वर्षों तक ऋण के सापेक्ष देय ब्याज का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹1.5 लाख तक की सालाना ब्याज में छूट भी प्रदान की जाएगी।
इस योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में अब तक लगभग साढ़े पांच हजार होम स्टे सफलतापूर्वक पंजीकृत हो चुके हैं। योजना के नियमों के अनुसार, पर्वतीय जिलों में होम स्टे के निर्माण या उनके सुधार की कुल लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹15 लाख तक की राशि सब्सिडी के रूप में दी जा रही है।
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि इस होम स्टे योजना के माध्यम से पहाड़ों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं और सरकार इसके संचालन में पूरा सहयोग कर रही है ताकि यहां के युवा नौकरी ढूंढने के बजाय खुद ‘नौकरी देने वाले’ बन सकें। यह योजना उत्तराखंड के ग्रामीण परिवेश को समृद्ध बनाने और पलायन रोकने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

