मध्य हिमालय के ऊंचे पर्वतीय ढलानों पर अस्थिर और लटके हुए ग्लेशियर आने वाले समय में बड़ी तबाही का कारण बन सकते हैं। इस गंभीर स्थिति पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और अन्य संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट इमेज के जरिए चेतावनी दी है कि यदि ये ग्लेशियर टूटते हैं, तो इनका प्रभाव बद्रीनाथ, माणा और हनुमान चट्टी जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक पहुँच सकता है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका है।
NGT का स्वत: संज्ञान और नोटिस
एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने इस मामले पर खुद संज्ञान लिया है। कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वच्छ गंगा मिशन और उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड सहित कई संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
विनाशकारी हिमस्खलन की आशंका
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में ‘एलिवेशन मॉडल’ का उपयोग करते हुए बताया है कि मध्य हिमालय की ढलानों पर मौजूद ग्लेशियर अब स्थिर नहीं रहे। यदि यह ग्लेशियर गिरते हैं, तो यह एक विशाल हिमस्खलन का रूप ले सकते हैं। इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि सबसे खराब स्थिति में यह बर्फीला सैलाब निचले इलाकों में बसे गांवों और तीर्थस्थलों तक आसानी से पहुँच सकता है।
सुनवाई की अगली तारीख
एनजीटी ने सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे मामले की अगली सुनवाई, जो कि 6 अगस्त को तय की गई है, उससे कम से कम एक सप्ताह पहले अपना आधिकारिक जवाब और कार्ययोजना पेश करें। प्रशासन को अब यह बताना होगा कि इन संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

