26 जनवरी को जहां पूरे देश की भांति उत्तराखंड में भी गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा था वहीं इस बीच कोटद्वार से एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 70 वर्षीय बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की दुकान पर लिखे नाम बदलने को लेकर दबाव बनाए जाने की स्थिति में जिम संचालक दीपक कुमार आगे आए और बुजुर्ग की रक्षा की। उनका परिचय पूछने पर दीपक ने कहा, “मैं दीपक हूं…मोहम्मद दीपक।” जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर इतनी तेजी से वायरल हुआ की दीपक देशभर में चर्चा का विषय बन गए।
मुद्दा चर्चित होने के बाद जहां एक ओर पूरे देश ने दीपक के साहस की सराहना की, तो वहीं दीपक के इस साहसिक कदम से प्रभावित होकर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दीपक को अपने वेतन से 2 लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की थी। इस क्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने इसे “मोहब्बत की जीत” बताते हुए दीपक को झारखंड बुलाकर सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने की बात भी कही थी।
2 लाख इनाम ठुकराकर बने इंसानियत के प्रतीक
हालांकि दीपक कुमार ने इस इनाम को लेने से साफ इनकार कर दिया। दीपक ने कहा कि उन्हें इस घोषणा की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यह राशि किसी ऐसे व्यक्ति को दी जाए जिसे वास्तव में इसकी आवश्यकता हो। दीपक ने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी पैसा या प्रसिद्धि पाना नहीं था, बल्कि केवल इंसानियत के पक्ष में खड़ा होना था।
दीपक के इस फैसले के बाद उनकी सराहना और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्ची बहादुरी और मानवता किसी पुरस्कार या इनाम की मोहताज नहीं होती। यह घटना आज के समय में सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का मजबूत संदेश देती है।


