Madhya Pradesh: नरवर किले से 3000 किलो की ऐतिहासिक तोप चोरी, ट्रक-क्रेन लाए थे चोर

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शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से 15 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 30 हथियारबंद बदमाशों ने सिंधिया राजवंश की करीब 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी कर ली है। इस दुस्साहसिक वारदात ने किले की सुरक्षा व्यवस्था और पुरातत्व विभाग के संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना से क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह वारदात देर रात उस समय हुई जब अत्याधुनिक हथियारों से लैस करीब 30 बदमाशों का एक संगठित गिरोह किले में दाखिल हुआ। बदमाशों ने किले के ओपन कचहरी परिसर को निशाना बनाया, जहां कुल 14 ऐतिहासिक तोपें प्रदर्शित की गई थीं। इन तोपों में से बदमाश 3,000 किलो वजनी अष्टधातु की एक बेहद दुर्लभ तोप को अपने साथ उड़ा ले गए।

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इस चोरी की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि बदमाश पूरी तैयारी और सोची-समझी मिलिट्री प्लानिंग के तहत आए थे। इतनी वजनी तोप को ले जाने के लिए आरोपी अपने साथ एक बड़ा ट्रक और क्रेन लेकर आए थे। इस बड़ी चोरी के बाद नरवर किले के ओपन कचहरी परिसर में रखी ऐतिहासिक तोपों की संख्या 14 से घटकर अब केवल 13 रह गई है।

सुरक्षाकर्मियों को गनपॉइंट पर लेकर वारदात

घटना के समय किले की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए पुलिस को आपबीती सुनाई है। सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने आए बदमाशों के पास आधुनिक और अत्याधुनिक हथियार मौजूद थे। बदमाशों ने ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को जान से मारने की सीधी धमकी दी और गनपॉइंट पर लेकर उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।

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सुरक्षाकर्मियों ने किले की बदहाल व्यवस्था की पोल खोलते हुए बताया कि परिसर में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐतिहासिक किले में रात के समय पर्याप्त रोशनी तक की व्यवस्था नहीं है और कर्मियों को टॉर्च जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी गई हैं। अत्याधुनिक हथियारों से लैस 30 बदमाशों के सामने सुरक्षाकर्मी सिर्फ लाठी के भरोसे तैनात थे, जिसके कारण वे मुकाबला करने में असमर्थ रहे।

अंतरराष्ट्रीय मार्केट में तीन से पांच करोड़ रुपये है कीमत

पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, चोरी गई यह ऐतिहासिक तोप मुख्य रूप से 16वीं शताब्दी की है। यह तोप भारतीय सैन्य इतिहास और उस दौर की उन्नत धातु कर्म तकनीक का एक बेजोड़ और उत्कृष्ट प्रतीक मानी जाती है। इस ऐतिहासिक तोप पर की गई विशेष नक्काशी और प्राचीन ऐतिहासिक चिह्न इसे बेहद खास, दुर्लभ और बहुमूल्य श्रेणी में खड़ा करते हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो इस राष्ट्रीय ऐतिहासिक धरोहर की असली कीमत को पैसों में नहीं आंका जा सकता है। इसके बावजूद, अवैध एंटीक बाजार में इस दुर्लभ अष्टधातु तोप की कीमत अंतरराष्ट्रीय मार्केट में करीब तीन से पांच करोड़ रुपये बताई जा रही है।

इतनी बेशकीमती और दुर्लभ धरोहर की योजनाबद्ध तरीके से हुई चोरी के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। तोप की भारी कीमत और वारदात के तौर-तरीकों को देखते हुए पुलिस को पुख्ता शक है कि इस पूरी वारदात के पीछे किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है। पुलिस ने मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है।

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