2004 के पुराने प्रकरण ने फिर पकड़ा तूल, जेनी के दावों और हरक सिंह रावत के पलटवार के बीच उठने लगे सियासी सवाल; क्या कांग्रेस के अंदर ही शुरू हो गई कोई नई जंग?
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में 2004 का एक पुराना प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। जेनी उर्फ इंदिरा देवरी का अचानक देहरादून पहुंचना और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को लेकर गंभीर आरोप लगाना महज एक पुरानी कहानी का दोबारा सामने आना नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी तलाशे जाने लगे हैं। जेनी के आरोपों के बाद हरक सिंह रावत का पलटवार और दोनों पक्षों के बीच सामने आ रहे दावे अब कई सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जेनी की इस पूरे प्रकरण में अचानक हुई एंट्री के पीछे केवल पुराने मामले को सामने लाने की मंशा है या फिर इसके राजनीतिक असर भी हो सकते हैं? कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं इस पूरे घटनाक्रम के जरिए हरक सिंह रावत को पार्टी के भीतर घेरने की कोई रणनीति तो नहीं बन रही?
दरअसल, उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही कांग्रेस में टिकटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। हरक सिंह रावत भी लगातार अपनी राजनीतिक सक्रियता और दावेदारी को लेकर चर्चा में रहे हैं। ऐसे में पुराने प्रकरण का दोबारा सुर्खियों में आना उनके लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर सकता है। हालांकि, इस घटनाक्रम के पीछे किसी राजनीतिक साजिश या पार्टी के भीतर किसी सुनियोजित रणनीति का फिलहाल कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी हरक सिंह रावत की राजनीतिक राह आसान नहीं रही थी। 2016 में कांग्रेस की तत्कालीन सरकार के खिलाफ बगावत और सरकार गिराने की कोशिशों से जुड़ा घटनाक्रम उनके राजनीतिक सफर पर लगातार सवाल खड़े करता रहा। उस दौर में कांग्रेस में उनकी वापसी और विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर भी काफी चर्चाएं हुई थीं। अब 2027 का चुनाव सामने है और ऐसे समय में जेनी के आरोपों ने एक बार फिर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है।

