देहरादून के पेट्रोल पंपों पर आने वाले दिनों में तेल की भारी किल्लत होने की आशंका गहरा गई है, जिसका मुख्य कारण तेल कंपनियों द्वारा सप्लाई के नियमों में किया गया बदलाव है। पहले कंपनियों द्वारा पंप संचालकों को तेल उधार दिया जाता था जिसका भुगतान चार दिनों के भीतर करना होता था, लेकिन अब कंपनियों ने बिना एडवांस पेमेंट के तेल देना बंद कर दिया है।
इस नई व्यवस्था के कारण छोटे और निजी पेट्रोल पंपों के पास स्टॉक खत्म होने लगा है और कई पंप तो दोपहर तक ही खाली हो रहे हैं। फिलहाल बड़े पंपों के पास केवल तीन दिनों का ही स्टॉक बचा है, जिससे आम जनता और पर्यटकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि भुगतान और आपूर्ति की यह समस्या बनी रही, तो शहर की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
आपूर्ति पर असर और वैकल्पिक ईंधन पर जोर
ईंधन का यह संकट केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों के विभिन्न जिलों में इसका असर दिखने लगा है। पौड़ी, चमोली, हल्द्वानी और अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों में तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जहाँ कई पंप ‘ड्राई’ होने की कगार पर हैं।
विशेष रूप से पर्यटन सीजन और चारधाम यात्रा के पीक समय पर होने के कारण वीकेंड पर मसूरी और ऋषिकेश जैसे स्थानों पर स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इस संकट को देखते हुए परिवहन विभाग अब राज्य में चलने वाले एलपीजी ऑटो को सीएनजी में बदलने पर जोर दे रहा है। साथ ही, सरकार ने ईंधन की बचत के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को अनिवार्य करने की कवायद शुरू कर दी है, ताकि पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को कम किया जा सके।

