देहरादून में भाजपा प्रदेश महामंत्रियों को झूठे वीडियो कांड में फंसाकर ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अदालत से एक बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि प्रकाश की अदालत ने मामले की गंभीरता से सुनवाई करते हुए पूर्व विधायक की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है।
गौरतलब है कि 14 जून 2026 को डालनवाला पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद सुरेश राठौर महज तीन दिनों तक ही जेल में रहे। सीजेएम कोर्ट में राठौर की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिलाष शर्मा ने दलील दी कि पुलिस ने बेहद मनमाने तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया है।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने शुरुआत में केवल सार्वजनिक उपद्रव (धारा 35(3) बीएनएसएस) के तहत नोटिस भेजा था, लेकिन बाद में अचानक जबरन वसूली की गंभीर धारा 308(6) बीएनएस जोड़कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह था कि पुलिस द्वारा बढ़ाई गई जबरन वसूली की यह नई धारा पूरी तरह से जमानती प्रकृति की है।
यद्यपि राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक पंकज राय ने इस जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि जिस धारा को आधार बनाकर गिरफ्तारी की गई है वह जमानती है। इसी आधार पर न्यायालय ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानती प्रस्तुत करने की शर्त पर पूर्व विधायक को तत्काल रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।

