उत्तराखंड सरकार द्वारा हाल के दिनों में दायित्वधारियों की दो सूचियां जारी की जा चुकी हैं, जिसमें 21 नेताओं को विभिन्न निगमों, बोर्डों और समितियों में जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। लेकिन इन नियुक्तियों के बीच राज्य का महत्वपूर्ण ‘वन विकास निगम’ अब भी बिना मुखिया के चल रहा है। करीब दो साल से वन निगम अध्यक्ष का पद रिक्त है, जिससे विभाग के कामकाज पर असर पड़ रहा है। केवल वन निगम ही नहीं, बल्कि कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN), गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) और कई मंडी समितियों में भी अध्यक्षों की नियुक्ति का इंतज़ार बना हुआ है। भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि आने वाली अगली सूची में इन रिक्त पदों पर भी घोषणा हो सकेगी।
कैलाश गहतोड़ी के निधन के बाद से रिक्त है पद
वन विकास निगम में नेतृत्व का संकट साल 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष कैलाश गहतोड़ी के निधन के बाद से शुरू हुआ। उनके जाने के बाद से शासन स्तर पर इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को किसी अन्य नेता को नहीं सौंपा गया है। उम्मीद की जा रही थी कि हालिया जारी हुई दायित्वधारियों की सूची में वन निगम के नए मुखिया का नाम शामिल होगा, लेकिन फिलहाल यह इंतज़ार और लंबा हो गया है।
अधिकारियों की कमी और प्रभारी व्यवस्था के भरोसे काम
वन निगम केवल अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों की कमी से भी जूझ रहा है। निगम के ढांचे में जीएम (GM), आरएम (RM) और डीएलएम (DLM) जैसे कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। वर्तमान में विभाग में ‘प्रभारी व्यवस्था’ के तहत जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक निर्णयों में देरी और तालमेल की कमी जैसी समस्याएं आ रही हैं।
अन्य विभागों में भी नियुक्तियों का इंतज़ार
राज्य में केवल वन निगम ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण विकास निगम और कार्यक्रम भी नेतृत्व विहीन हैं:
- KMVN और GMVN: कुमाऊं और गढ़वाल मंडल विकास निगम को भी अब तक नए अध्यक्ष नहीं मिल पाए हैं।
- मंडी समितियां: प्रदेश की विभिन्न मंडी समितियों में भी अध्यक्ष पद खाली हैं।
- बीस सूत्रीय कार्यक्रम: इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए भी किसी उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की गई है।

