उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के समापन कार्यक्रम में शिरकत की। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में देश के कृषि परिदृश्य को बदलने और पर्यावरण अनुकूल खेती को अपनाने पर गहन मंथन हुआ।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी विशेष रूप से मौजूद रहे। सम्मेलन के दौरान मुख्य रूप से जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाने और इसे देशव्यापी स्तर पर बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया, ताकि किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भूमि की ऊर्वरा शक्ति को भी सुरक्षित रखा जा सके।
छोटे किसानों के लिए क्लस्टर खेती की पहल
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखंड की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य में करीब 90 फीसदी किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जिनके पास खेती के लिए बेहद सीमित भूमि है।
इन छोटे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और कृषि उत्पादन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार क्लस्टर खेती को तेजी से बढ़ावा दे रही है। इस रणनीति के माध्यम से छोटे-छोटे खेतों को मिलाकर सामूहिक रूप से आधुनिक पद्धतियों का उपयोग किया जा रहा है।
जैविक खेती का विस्तार से बढ़ा लाभ
राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण अनुकूल और रसायन मुक्त कृषि को बढ़ावा देने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को विशेष प्रोत्साहन मिल रहा है, जिसके तहत अब तक करीब 2.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती के अंतर्गत लाया जा चुका है। यह रकबा राज्य के कुल कृषि क्षेत्रफल का लगभग 40 फीसदी हिस्सा है, जो उत्तराखंड को जैविक खेती के मामले में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करता है।
मिलेट नीति के लिए करोड़ों का बजट
उत्तराखंड सरकार पारंपरिक और पौष्टिक मोटे अनाज की फसलों के उत्पादन को पुनर्जीवित करने के लिए भी बड़े पैमाने पर वित्तीय निवेश कर रही है। राज्य में मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए 134.89 करोड़ रुपये की विशेष नीति लागू की गई है, जिससे मोटे अनाज उगाने वाले किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक मदद और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा, किसानों को संगठित करने और उन्हें उनकी फसलों का सही मूल्य दिलाने के उद्देश्य से राज्य में 161 कृषक उत्पादक संगठनों का गठन भी किया गया है, जो किसानों को बीज से लेकर बाजार तक हर स्तर पर तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान कर रहे हैं।

