उत्तराखंड पुलिस पर बर्बरता के आरोप लगाने वाले केशव थलवाल अब गढ़वाल आई जी राजीव स्वरूप पर जमकर बरसे हैं। थलवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली है और सीधे-सीधे आई जी राजीव स्वरूप को निशाने पर लिया है। हालांकि उन्होंने कहा है कि उसे इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस जिस जांच को छह महीने से कर रही है उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि प्रदेश की जनता को पता चल सके कि केशव थलवाल ने मित्र पुलिस पर जो आरोप लगाए हैं वो सही हैं या नहीं। उधर दूसरी ओर आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप के पक्ष में बाल्मिकी समाज देहरादून की सड़क पर उतर आया है।
समाज से जुड़े लोगों ने पुलिस को तहरीर सौंपकर केशव थलवाल को गिरफ्तार कर मुकदमा करने की मांग की है। पुलिस को तहरीर सौंपने वाले लोगों का कहना है कि थलवाल ने आईजी गढ़वाल के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तमाल किया है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर राजीव स्वरूप खुद मामले को संज्ञान में लेकर खुद मुकदमा क्यों नहीं दर्ज करते। आखिर इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की पैरवी के लिए एक समुदाय को क्यों आगे आना पड़ रहा है। क्या उत्तराखंड पुलिस के बड़े अधिकारी केशव थलवाल पर मुकदमा दर्ज नहीं कर सकते कोई कानूनी पेंच है या फिर कुछ और।
बहरहाल सवाल ये भी है कि आखिर केशव थलवाल को न्याय के लिए इतना क्यों लटकाया जा रहा है। जांच हो गई है तो रिपोर्ट क्यों नहीं दी जा रही है। अगर जांच की आंच केशव के विरुद्ध है तो उसे खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं और अगर केशव थलवाल जिन पुलिस अधिकारियों पर बर्बरता के इल्जाम लगा रहा है अगर उन पर आंच आ रही है तो उन पर एक्शन क्यों नहीं आखिर मामले को लटकाया क्यों जा रहा है। शिखंडी की आड़ लेकर भीष्म पर तीरों की बौछार अर्जुन के लिए सही नहीं लगती। बहरहाल केशव मामले में जो भी है उसे आईने की तरह साफ होना चाहिए ताकि राज्य की जनता का भरोसा कायम रहे और खाकी का इकबाल भी बुलंद रहे। क्योंकि कहा जाता है कि, देर से मिला न्याय भी अन्याय के समान होता है।

