उत्तराखंड के सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा एक में प्रवेश के लिए आयु सीमा में ढील देने की तैयारी चल रही है। वर्तमान नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल तक बच्चे की उम्र 6 साल पूरी होनी अनिवार्य है, लेकिन अब शिक्षा निदेशालय ने शासन को प्रस्ताव भेजा है कि जो बच्चे 30 सितंबर 2026 तक 6 साल के हो रहे हैं, उन्हें भी कक्षा एक में दाखिला दे दिया जाए। शासन, निदेशालय और जिला शिक्षा अधिकारियों के अलग-अलग आदेशों के कारण वर्तमान में अभिभावक और स्कूल संचालक असमंजस की स्थिति में हैं, जिसे स्पष्ट करने के लिए अब नए आदेश का इंतज़ार किया जा रहा है।
आयु सीमा में प्रस्तावित बदलाव
प्रारंभिक शिक्षा के अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी के अनुसार, इस साल उन बच्चों को भी राहत देने की योजना है जो शैक्षणिक सत्र शुरू होने के समय (1 अप्रैल) तो 6 साल के नहीं हैं, लेकिन 30 सितंबर तक यह आयु पूरी कर लेंगे। यदि शासन इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है, तो हजारों उन बच्चों का साल खराब होने से बच जाएगा जो कुछ महीनों के अंतर से दाखिले से वंचित रह रहे थे।
प्री-प्राइमरी के बच्चों को मिलेगी निरंतरता
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बच्चों ने पहले ही नर्सरी, एलकेजी (LKG) या यूकेजी (UKG) में प्रवेश ले लिया है, उनकी पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आएगी। उन्हें कक्षा एक में प्रवेश की अनुमति पिछले वर्षों की भांति ही दी जाएगी, ताकि उनकी शिक्षा की निरंतरता बनी रहे और उन्हें दोबारा वही कक्षा न पढ़नी पड़े।
अभिभावकों और स्कूलों में दुविधा
फिलहाल स्कूलों को निर्देश हैं कि 1 अप्रैल को बच्चा 6 साल का होना चाहिए, जबकि पिछले साल जून में जारी एक आदेश में 1 जुलाई तक की छूट दी गई थी। अब 30 सितंबर का नया प्रस्ताव आने से स्कूल और अभिभावक दोनों भ्रमित हैं। शासन से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाएगी, जिससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सकेगी।

