उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को “धाकड़ धामी” यूं ही नहीं कहा जाता, उनके नेतृत्व में भाजपा सरकार उत्तराखंड में अपने पांच साल पूरे करने वाली पहली सरकार बनने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते चार सालों में उत्तराखंड के विकास और उसकी गरिमा को शीर्ष पर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, तो वहीं जन समस्या के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री धामी ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ विजन को पेश किया। धाकड़ धामी का यह विजन आज धरातल पर चरितार्थ होता दिखाई दे रहा है। इस क्रम में उधम सिंह नगर के काशीपुर के आनंद खेड़ा गांव में समस्या निस्तारण के लिए जनता प्रशासन के पास नहीं बल्कि स्वंय प्रशासन ही चलकर जनता के बीच आया। इस विशेष शिविर में एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 23 विभागों के आला अधिकारियों ने एक ही छत के नीचे बैठकर जनता की शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया। यहां सिर्फ शिकायतें नहीं सुनी गईं, बल्कि वर्षों से लंबित फाइलों पर चंद मिनटों में फैसले लेकर जनता को सीधा लाभ पहुंचाया गया।
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार”
उधम सिहं नगर के आनंद खेड़ा गांव में आज प्रशासन की पूरी टीम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के संकल्प को सिद्ध करती हुई जनता की सेवा में नतमस्तक दिखाई दी, जहां मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों का असर साफ दिखा कि अब आम जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, बल्कि सरकार खुद चलकर आपके द्वार पहुंच रही है। वहीं उप-जिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह की मुस्तैदी ने यह साफ कर दिया कि धामी सरकार में काम के प्रति लापरवाही की कोई जगह नहीं है, जो दर्शाता है कि ‘धाकड़ धामी’ का यह सुशासन मॉडल आज उत्तराखंड के उन ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रहा है जहां विकास की गूंज भी नाममात्र पहुंच पाती थी। धामी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि हर न्याय पंचायत स्तर तक ऐसे शिविर लगें ताकि कोई भी गरीब और जरूरतमंद सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए और काशीपुर की यह तस्वीर चीख-चीख कर बता रही है कि जब मुख्यमंत्री का इरादा ‘धाकड़’ हो, तो पूरी व्यवस्था को जनता के प्रति जवाबदेह बनने में वक्त नहीं लगता।
जनता ने जताया सरकार पर भरोसा
यह उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार हुआ है कि जब जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण को लेकर सरकारी अमला खुद जनता के द्वार आया है। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता होमो विश्वास ने मुख्यमंत्री धामी का आभार जताते हुए कहा कि यह कैंप स्थानीय लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। वहीं, श्रम विभाग के लाभार्थियों, महिला एवं बाल विकास विभाग की महिलाओं , ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने आधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धन्यवाद दिया, हर चेहरे पर एक ही संतोष था कि उनकी सरकार उनके साथ खड़ी है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने सियासत की परिभाषा को पलट कर रख दिया है, अब जनता को सरकारी दफ्तरों की चौखट पर माथा नहीं टेकना पड़ता, बल्कि ‘धाकड़ धामी’ का पूरा प्रशासनिक अमला खुद जनता की चौखट पर दस्तक दे रहा है। धाकड़ धामी का यह नेतृत्व इस बात का प्रमाण है कि अब देवभूमि में सरकार ‘रिमोट कंट्रोल’ से नहीं, बल्कि ‘धरातलीय कार्यप्रणाली’ से चल रही है। मुख्यमंत्री धामी का यह ‘धाकड़ मॉडल’ भ्रष्टाचार और देरी पर सीधा प्रहार है, जो अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रहा है। आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नेतृत्व इस बात का गवाह है कि जब प्रदेश की कमान सुरक्षित हाथों में होती है, तो संकल्प भी पूरे होते हैं और सपने भी हकीकत बनते हैं।


