कुछ लोग दबाव सह लेते हैं कुछ लोग बगावत कर बैठते हैं और एक तबका ऐसा भी होता है जो दबाव सह नहीं पाता और खुदकुशी जैसा रास्ता अपनाता है और अपने परिवार को रोता बिलखता छोड़ देता है। जैसा कि चंपावत में हुआ. कुमाऊं मंडल विकास निगम की गैस एंजेसी में प्रबंधक पद पर तैनात दयाल सिंह रावत ने खुदकुशी कर ली।
दूसरी और बेंगलुरु के रहने वाले राकेश बी. पाल भी हैं जिन्होंने ‘ऐप्पल’ जैसी बड़ी कंपनी और दूसरे कई बड़े कॉर्पोरेट सेक्टर में काफी लंबे अर्से तक नौकरी की लेकिन मजा नहीं आया और शानदार पगार और लॉजवाब करियर को ठोकर मार दी और अब सड़कों पर खुश होकर इलैक्ट्रिक ऑटो चला रहे हैं।

पता नहीं आप यकीन करो या न करो लेकिंन सोशल मीडिया में राकेश बी पॉल जोरदार सुर्खियां बटोर रहे हैं। यूजर्स उनेक इस कदम को साहसी बता रहे हैं तो कुछ शानदार कुछ उन्हें सैल्यूट भी कर रहे हैं। एक यूजर्स तो कंमेंट में लिखते हैं, “नौकर तो नौकर ही होता है चाहे पांच लाख कमा ले”… बहरहाल सवाल ये है कि आखिर राकेश बी पॉल ने शानदार नौकरी को ठोकर क्यों मार दी. इसका जवाब है मानसिक शांति और सच्ची खुशी । राकेश का अनुभव है कि कॉर्पोरेट जगत में केवल लोगों का इस्तेमाल किया जाता है। राकेश कहते हैं वहां दूसरों को खुश करने में वे खुद को भूल गए थे।
इसके अलावा कॉर्पोरेट के दबाव के कारण वे गंभीर डिप्रेशन का शिकार हो गए, जिसके लिए उन्हें अस्पताल में इलाज भी कराना पड़ा। दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय राकेश ने खुद को बदलने का फैसला किया। अब वे सड़कों पर अपना इलेक्ट्रिक ऑटो चलाते हैं, डांस क्लास लेते हैं और पेंटिंग का अपना शौक पूरा करते हैं। राकेश का कहना है कि अब वे मानसिक रूप से पूरी तरह ‘आजाद’ और खुश हैं।
बहरहाल अगर सच में राकेश बी पाल ने स्वरोजगार का कदम उठाया है तो हम भी उन्हें सलाम करते हैं क्योंकि हर किसी में शानदार करियर छोड़ने का साहस नहीं होता। लेकिन सच यही है कि, “और भी हैं राहें”

