सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो की सच्चाई पर सवाल, राजनीतिक लाभ लेने के वायरल किया जा रहा AI द्वारा निर्मित ऑडियो: राठौर..

ख़बर शेयर करें

देहरादून।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित ऑडियो को लेकर पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने अब खुलकर अपना पक्ष रखा है। मीडिया के सामने आए सुरेश राठौर ने ऑडियो को पूरी तरह से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) निर्मित बताते हुए इसे उनकी छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए उर्मिला राठौर के मोबाइल फोन को जब्त कर उसकी फोरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए।
सुरेश राठौर ने कहा कि लगातार भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ जिस तरह से अनर्गल और बेबुनियाद बयानबाज़ी की जा रही है, उसके पीछे एक सुनियोजित साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि वायरल ऑडियो को जानबूझकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया, ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। उनका कहना था कि यदि मोबाइल की फोरेंसिक जांच होती है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि ऑडियो कहां से, कैसे और किस उद्देश्य से बनाया और प्रसारित किया गया।
पूर्व विधायक ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस कथित एआई निर्मित ऑडियो को लेकर गलत प्रचार कर रही है, जिससे साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस मुद्दाविहीन होती जा रही है। सुरेश राठौर ने कहा कि यदि कांग्रेस के पास वास्तव में जनहित से जुड़े मुद्दे होते, तो वह इस तरह के फर्जी और तकनीक से गढ़े गए ऑडियो पर बवाल खड़ा करने के बजाय सरकार के सामने जनता की समस्याएं रखती।
उन्होंने यह भी कहा कि आज की राजनीति में एआई जैसी तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है और इसके जरिए किसी की भी आवाज या वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा सकता है। ऐसे में बिना तथ्यों की जांच किए किसी भी सामग्री पर भरोसा करना न सिर्फ गलत है, बल्कि लोकतंत्र के लिए भी खतरनाक है। सुरेश राठौर ने मीडिया से अपील की कि वे भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पूरी पड़ताल करें।
पूर्व विधायक ने यह स्पष्ट किया कि वह इस मामले से पीछे हटने वाले नहीं हैं और यदि जरूरत पड़ी तो कानूनी रास्ता भी अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि सच्चाई सामने आए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े क्यों न हों।
वहीं, इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की सत्यता, एआई तकनीक का दुरुपयोग और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को लेकर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं और वायरल ऑडियो की वास्तविकता कब तक सामने आती है।